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MP News: मालवा में बदलती खेती की तस्वीर, सोयाबीन के साथ अब मक्का भी किसानों की पसंद— जानिए कैसे कमा रहे मुनाफा

MP News: मालवा अंचल में इस साल खेती की रणनीति में एक दिलचस्प बदलाव देखा जा रहा है। परंपरागत रूप से सोयाबीन की प्रमुखता वाले इस क्षेत्र में अब किसान मक्का को भी गंभीरता से अपना रहे हैं। बदलते मौसम, गिरते भाव, और उपज की अनिश्चितता के कारण किसान अब एक ही खेत में अलग-अलग फसलों की बुवाई कर जोखिम को बांट रहे हैं और मुनाफा बढ़ाने की रणनीति बना रहे हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 24 जून 2025 से क्षेत्र में मानसून की दस्तक होगी, और पिछले दिनों हुई प्री-मानसून बारिश ने खेतों में नमी बनाए रखी है। इस बार किसान सोयाबीन के साथ-साथ मक्का की बोवाई पर भी जोर दे रहे हैं।

Cultivation of Maize with Soybean in Alot Strategy of Farmers Analysis of Cost Yield and Profit

सोयाबीन की गिरती कीमतों और बारिश से होने वाले नुकसान से त्रस्त किसान अब मक्का को एक लाभकारी विकल्प के रूप में देख रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मक्का पर 4,000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान भी किसानों को आकर्षित कर रहा है। आइए, इस बदलाव के कारणों, लागत, उपज, और मुनाफे की संभावनाओं को विस्तार से समझते हैं।

मानसून से पहले ही जुटे किसान

आलोट क्षेत्र में 24 जून से मानसून की संभावित दस्तक से पहले ही खेतों में हल चलने लगे हैं। पिछले दिनों हुई बारिश से खेतों में नमी बनी हुई है, और यही समय किसान बुवाई की शुरुआत का मानते हैं। इस बार सिर्फ सोयाबीन नहीं, बल्कि मक्का की फसल ने भी किसानों के बीच अपनी जगह बना ली है।

  • क्यों बदली किसानों ने रणनीति?
  • सोयाबीन की कीमतों ने किया निराश
  • पिछले तीन वर्षों से सोयाबीन के दाम लगातार गिर रहे हैं।
  • औसतन बाजार में भाव ₹4,000 प्रति क्विंटल तक सीमित रहा है।
  • अधिक बारिश या बीमारी लगने पर फसल की उपज 3 क्विंटल प्रति बीघा से भी कम हो जाती है, जिससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है।
  • एक बीघा सोयाबीन की खेती में ₹10,000 से अधिक लागत आती है, ऐसे में उपज कम होने पर मुनाफा तो दूर, लागत भी नहीं निकलती।

मक्का बनी विकल्प की फसल

  • मक्का की फसल में प्रति बीघा 15 क्विंटल तक उपज मिलने की संभावना होती है।
  • बाजार में मक्का का भाव ₹2,400 प्रति क्विंटल से ऊपर चल रहा है।
  • लागत लगभग ₹15,000 प्रति बीघा आती है, लेकिन अधिक उपज और अच्छी मांग के चलते मुनाफा संभावित है।
  • सरकार भी मक्का उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है - मध्यप्रदेश सरकार ₹4,000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान दे रही है।

किसानों की बदलती सोच

धतुरिया गांव के किसान मोहन सिंह राठौर इस बदलाव की मिसाल बन गए हैं। उन्होंने इस बार 4 बीघा में मक्का और 3 बीघा में सोयाबीन की बुवाई का निर्णय लिया है। "सोयाबीन में बीमारी ज्यादा लगती है। पैदावार भी घट रही है और बाजार में दाम भी नहीं मिल रहे। मक्का की खेती में कम जोखिम है, और अब सरकार भी साथ दे रही है," - मोहन सिंह राठौर

विविध फसलें, बंटा जोखिम

  • किसानों का कहना है कि एक ही फसल पर निर्भर रहना अब सुरक्षित नहीं है।
  • जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश, और बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए मल्टी-क्रॉपिंग यानी एक साथ दो फसलें लेने की रणनीति अब लोकप्रिय हो रही है।

कृषि विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञ डॉ सतीश मालवीय के अनुसार: "मालवा क्षेत्र में मक्का की फसल पहले केवल पशु चारे और सीमित उपयोग के लिए बोई जाती थी, लेकिन अब इसकी प्रोसेसिंग यूनिटें, स्टॉर्च फैक्ट्री और निर्यात की संभावनाएं बढ़ी हैं। यह किसानों के लिए टिकाऊ विकल्प बन सकती है।"

आगे की संभावनाएं

  • कृषि आधारित स्टार्टअप्स और मिलों की रुचि मक्का उत्पादन में बढ़ रही है।
  • सरकार भी मक्का को वैकल्पिक नकदी फसल (Cash Crop) के रूप में आगे बढ़ा रही है।
  • यदि भाव स्थिर रहे और खरीदी समय पर हो, तो आने वाले वर्षों में मक्का सोयाबीन को टक्कर दे सकती है।

मक्का, एक स्मार्ट किसान की फसल

सोयाबीन अब भी मालवा की पहचान है, लेकिन किसानों ने अब यह समझ लिया है कि एक फसल पर निर्भर रहना घाटे का सौदा हो सकता है। मक्का जैसी फसलें न केवल मुनाफा देती हैं, बल्कि खरीफ सीजन में जोखिम को संतुलित भी करती हैं। आलोट जैसे क्षेत्रों में इस बदलाव का असर आने वाले वर्षों में उत्पादन, व्यापार और किसान की आर्थिक स्थिति - तीनों पर पड़ेगा।

✍🏻 रिपोर्ट: [ LN मालवीय ]

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