MP News: ठेकेदार आत्महत्या के लिए किया ई-मेल, जल जीवन मिशन में अटकी 158 करोड़ सुरक्षा निधि

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के प्रमुख अभियंता (ईएनसी) केके सोनगरिया द्वारा केंद्र सरकार को लिखा गया पत्र हाल के दिनों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदारों की सुरक्षा निधि, जो कि 158 करोड़ रुपये है, पिछले दो वर्षों से तकनीकी कारणों से अटकी हुई है। इस समस्या के चलते कई ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं, और उनमें से एक ठेकेदार ने ई-मेल के माध्यम से आत्महत्या की धमकी दी है।

Contractors are sending suicide e-mails 158 crore security fund stuck in Jal Jeevan Mission

समस्या की जड़ें

ईएनसी ने केंद्र और राज्य सरकार को सूचित किया है कि सितंबर 2021 से पहले की सुरक्षा निधि, जीएसटी, इनकम टैक्स और रॉयल्टी की राशि पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) पोर्टल पर नहीं दिखाई दे रही है। इसके कारण ठेकेदार अपनी बकाया राशि हासिल नहीं कर पा रहे हैं, जो उनके लिए गंभीर वित्तीय समस्या पैदा कर रही है। हर ठेकेदार के बिल से 5% राशि काटी जाती है, जिसे सुरक्षा निधि कहा जाता है, और यह राशि एक वर्ष की गुणवत्ता गारंटी के बाद लौटाई जाती है।

तकनीकी दिक्कतें

भारत सरकार का पीएफएमएस सॉफ्टवेयर ठेकेदारों के भुगतान की प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण, सितंबर 2021 से पहले की कटौती का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे ठेकेदारों को अपनी सुरक्षा निधि वापस नहीं मिल पा रही है। कई प्रयासों के बावजूद, इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

ठेकेदारों की परेशानियां

इस स्थिति ने ठेकेदारों को मानसिक और आर्थिक तनाव में डाल दिया है। वे अपनी परियोजनाओं को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं और कुछ ठेकेदारों ने तो कोर्ट जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। उनके लिए यह समय अत्यंत कठिनाई भरा है, और ईएनसी द्वारा प्राप्त ई-मेल में आत्महत्या की धमकी इस बात का प्रमाण है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है।

संभावित समाधान

केंद्र और राज्य सरकार को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। ठेकेदारों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जा सकता है, जो तकनीकी मुद्दों को प्राथमिकता से हल कर सके।

ईएनसी केके सोनगरिया का पत्र न केवल ठेकेदारों के आर्थिक संकट को उजागर करता है, बल्कि यह उनकी मानसिक स्वास्थ्य की चिंताओं को भी सामने लाता है। इस मुद्दे का समाधान आवश्यक है ताकि ठेकेदारों को उनकी बकाया राशि मिल सके और वे अपने कार्यों में पुनः सक्रिय हो सकें। सरकार को इस संकट को तुरंत संज्ञान में लेते हुए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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