मोहन कैबिनेट में जाति का संयोजन, नए-पुराने चेहरे का संतुलन, मध्य प्रदेश में ये है भाजपा का लोकसभा प्लान

MP Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश में ओबीसी मुख्यमंत्री के साथ सामान्य और एससी डिप्टी सीएम की जिस सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया था। अब मंत्रिमंडल के गठन में भी उसका विस्तार दिख रहा है। नई सरकार को 28 नए मंत्री मिले है

MP Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव सरकार का पहला मंत्रिमंडल गठन सोमवार हो गया हैं। मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में 28 मंत्रि बनाए गए हैं। इनमें 18 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली है।मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण साधने और क्षेत्रीय बैलेंस बनाने की पूरी कोशिश बीजेपी नेतृत्व ने की है ताकि 2024 के लोकसभा में जीत का फॉर्मूला दोहरा सके।

मध्य प्रदेश में जिन 28 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली है। उनमें 18 कैबिनेट, 6 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 4 राज्यमंत्रियों ने शपथ ली है। नए मंत्रियों में ओबीसी का दबदबा है। 28 में से 12 मंत्री ओबीसी वर्ग से बनाए गए हैं।

CM Mohan Yadav cabinet

सामान्य वर्ग से 7 और अनुसूचित जाति से 5 मंत्री बनाए गए हैं। नई सरकार के नए मंत्रिमंडल में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से भी 4 मंत्री बनाए गए हैं। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में जातीय गणित के साथ ही क्षेत्रीय समीकरण, गुटीय संतुलन साधने की कवायद भी साफ नजर आ रही है।

मोहन के मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे के नेताओं को भी जगह दिया गया है तो वहीं शिवराज के करीबियों को शामिल किया गया है। हालांकि शिवराज सरकार में मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह, मीणा सिंह, उषा ठाकुर, बृजेंद्र सिंह यादव, बृजेंद्र प्रताप सिंह, गोपाल भार्गव, विसाहू लाल सिंह और हरदीप सिंह डंग को नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। इस बार ऐसे नेताओं के नाम भी मंत्रिमंडल में हैं जो इन दोनों में से किसी के गुट से नहीं हैं यानी या तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नाम बढ़ाया होगा या फिर सीधे हाईकमान ने।

मोहन मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर और ऐदल सिंह कंसाना जैसे नेता नए मंत्रिमंडल में जगह बनाने में सफल रहे हैं तो शिवराज के करीबी माने जाने वाले विश्वास सारंग जैसे नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह 2008 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। 2013 में उन्हें मात मिली थी लेकिन 2018 और पार्टी बदलने के बाद 2020 के उपचुनाव में भी वह इसी सीट से चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। प्रद्युम्न सिंह तोमर और तुलसी सिलावट, शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में भी मंत्री रहे थे।

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