MP Election: कांग्रेस के दबदबे वाली सीट पर इस बार होगा रोचक मुकाबला, BJP ने चित्रकूट से घोषित किया प्रत्याशी
Chitrkoot Assembly Seat:
Chitrkoot Assembly Seat: चित्रकूट विधानसभा सीट मध्यप्रदेश के सतना की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट मानी जाती है। चित्रकूट सीट पर वर्तमान कांग्रेस के विधायक नीलांशु चतुर्वेदी काबिज हैं। इस सीट पर अब तक मतदाताओं ने अधिकतर कांग्रेस पर ही विश्वास जताया है। इस बार चुनाव में नीलांशु चतुर्वेदी के सामने पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल इस बार चित्रकूट विधानसभा सीट के परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होंगे। यह तो मतदाता ही तय करेंगे।
सतना जिला पंचायत सतना के उपाध्यक्ष और फिर कार्यवाहक अध्यक्ष रहे सुरेंद्र सिंह साल 2008 में पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने थे। उन्होंने उस समय कांग्रेस के प्रेम सिंह को पराजित किया था। हालांकि गहरवार 2013 में अपनी सीट नही बचा पाए थे और प्रेम सिंह ने उन्हें 10 हजार 970 वोटों से पराजित कर कुर्सी वापस छीन ली थी।

प्रेम सिंह के निधन के बाद चित्रकूट उपचुनाव में भाजपा ने यहां शंकर दयाल त्रिपाठी के रूप में नए चेहरे को मैदान में उतारा था। लेकिन शंकरदयाल जनता का विश्वास नहीं जीत पाए और यहां कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी ने उपचुनाव में जीत हासिल कर ली। वर्ष 2018 के चुनाव में गहरवार की फिर वापसी हुई और तमाम कयासों को दरकिनार करते हुए उन्हें भाजपा ने प्रत्याशी बनाया लेकिन अपने तीसरे चुनाव में गहरवार दूसरी बार भी हार गए। उन्हें कांग्रेस के नीलांशु चतुर्वेदी ने 10 हजार से 198 वोटों से हराया।
इस बार भी बीजेपी चित्रकूट सीट पर चेहरा बदलेगी क्षेत्र में चर्चा थी। लेकिन चौथी बार भी पार्टी ने सुरेंद्र सिंह को प्रत्याशी घोषित किया है। यहां से बीजेपी के टिकट के लिए चन्द्रकमल त्रिपाठी सुभाष शर्मा डोली, शंकरदयाल त्रिपाठी भी टिकट के दावेदार थे लेकिन सुरेंद्र सिंह ने सभी को पीछे छोड़ दिया।
चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के हिनौता गांव के बीजेपी प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह गहरवार सतना जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष गणेश सिंह के सांसद बनने पर उन्होंने कार्यवाहक जिला पंचायत अध्यक्ष के दायित्व का भी कुछ वर्षों के लिए निर्वाहन किया था।
स्नातकोत्तर और विधि स्नातक (एलएलबी) की डिग्री हासिल कर चुके सुरेंद्र सिंह को बीजेपी सतना का जिलाध्यक्ष भी बनाया गया। उन्होंने संगठनात्मक कामकाज बखूबी संभाला। अपने विधायकी के कार्यकाल में उन्होंने चित्रकूट क्षेत्र में जल संरचनाओ के सुधार तथा शिक्षा की बेहतरी के लिए भी प्रयास किये। चुनावो में हार के बाद भी इलाके में सक्रियता और जनसंवाद का सिलसिला उन्होंने जारी रखा।
बीजेपी के लिए चित्रकूट क्षेत्र में चुनावी जीत की राह आसान नहीं है। बीते 20 साल में सिर्फ 1 बार और वह भी पहली बार 2008 मे यहां बीजेपी को जीत सुरेंद्र सिंह गहरवार ने ही दिलाई थी। उसके पूर्व 2003 में चली बदलाव की बयार के बावजूद इस सीट पर तब के सतना सांसद रामानंद सिंह बीजेपी के टिकट पर बुरी तरह पराजित हुए थे। जानकारों की मानें तो इस बार भी फिलहाल तो बीजेपी यहां अच्छी स्थिति में नजर नहीं आ रही है। सुरेंद्र सिंह को लेकर क्षेत्र में नाराजगी भी रही है।
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