बुंदेलखंड दुग्ध संघः पटना और कोल्हापुर की सेहत बना रहा सागर का दूध
मप्र के बुंदेलखंड की गायों-भैंसों का दूध पीकर बिहार में पटना और महाराष्ट्र के कोल्हापुर के लोग अपनी सेहत बना रहे हैं। सागर से रोजाना यहां करीब 60 हजार लीटर दूध भेजा जा रहा है। दरअसल सरकारी स्तर पर संचालित बुंदेलखंड सहकारी दुग्ध संघ सागर से दूध मध्यप्रदेश से बाहर अन्य राज्यों को भी भेजा जा रहा है। वर्तमान में बिहार के पटना शहर को दूध भेजा जाता है। जबकि इसके पहले कोल्हापुर को दूध भेजा जाता था। सांची के दूध में पाश्चुराज्ड बफ मिल्क में फैट -6.5 प्रतिशत एवं एसएनएफ 9.1 प्रतिशत है। संघ से 700 से ज्यादा समितियों के माध्यम से हजारों लोग जुड़े हैं।

संभाग के सभी छह जिलों से करीब 1.25 लाख लीटर दूध खरीदते हैं
बुंदेलखंड सहकारी दुग्ध संघ सिंरोजा प्रबंधन सागर संभाग के सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, निवाड़ी दमोह जिले से रोजाना दूध खरीदा जात है। यह दूध सीधे पशु पालकों से न खरीदकर इनकी बनी समितियों के माध्यम दूध खरीदा जाता है। रोजाना करीब 1 लाख 25 हजार से 1 लाख 30 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है। इसके प्रोसेसिंग से गुजारकर दुध को टैंकरों में पैक कर भेजा जाता है। हाल ही में महाराष्ट्र में कोल्हापुर दुग्ध संघ को मिल्क उपलब्ध कराने के लिए नए सिरे से टेंडर किया जा रहा है। दूध के अलावा बुंदेलखंड दुग्ध संघ मिल्क प्रोडक्ट भी तैयार कर रहा है। इसमें देशी घी, सांची पेड़ा, दही, मिल्ककेक, लस्सी, रबड़ी तक सागर व बुंदेलखंड के मॉर्केट में उपलब्ध करा रहे हैं।

बुंदेलखंड में जितनी खपत, उससे कई गुना उत्पादन
बुंदेलखंड इलाके में दूध का उत्पादन काफी ज्यादा है, जबकि यहां दूध की खपत बहुत कम है। अतिरिक्त दूध को हम समितियों के माध्यम से खरीदकर प्रोसेस कर प्रदेश व देश के अन्य राज्यों में भेजकर राजस्व ला सकते हैं। इससे यहां पशु पालकों व दुग्ध उत्पादकों को भी लाभ मिलेगा। सबसे अच्छी बात यह है कि हम बाजार रेट से बेहतर दाम पर दूध लेते हैं, पशु पालक भी गुणवत्ता वाला बिना मिलावट का दूध हमें देते हैं। हम दूध की गुणवत्ता की जांच भी करते हैं। जैसे-जैसे हमारी खपत बढे़गी, वैसे-वैसे हम प्रयास करेंगे कि ज्यादा से ज्यादा लोगों ने दूध खरीदकर उन्हें आर्थिक रुप से संपन्न बनाया जाए।
- जितेंद्र गहलोत, महाप्रबंधक, बुंदेलखंड सहकारी दुग्ध संघ सिरोंजा सागर












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