MP News: सिंधिया को साधने BJP के नियम भी ताक पर, भाजपा ने जसमंत जाटव को बनाया शिवपुरी जिला अध्यक्ष
MP Politics News: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाल ही में 18 जिलों के अध्यक्षों की घोषणा की है। लेकिन इन घोषणा के बीच शिवपुरी जिले में एक चौंकाने वाला निर्णय लिया गया है। शिवपुरी में जसमंत जाटव को जिला अध्यक्ष बनाया गया है, जो मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।
जाटव को पार्टी में शामिल हुए अभी चार साल भी नहीं हुए हैं, जबकि बीजेपी के नियम के अनुसार, कोई भी कार्यकर्ता जिला अध्यक्ष बनने के लिए कम से कम 6 साल पार्टी का प्राथमिक सदस्य होना चाहिए।

इससे पार्टी के संविधान की अनदेखी की गई है, और माना जा रहा है कि यह निर्णय केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है। जसमंत जाटव 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला था। अब उन्हें पार्टी में सिंधिया के करीबी माने जाने की वजह से शिवपुरी का जिला अध्यक्ष बनाया गया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या पार्टी ने अपने संविधान के नियमों को ताक पर रखकर सिर्फ एक राजनीतिक समीकरण को साधने के लिए यह कदम उठाया है।
बीजेपी के संविधान का उल्लंघन
बीजेपी के संविधान के अनुसार, पार्टी के जिला अध्यक्ष पद के लिए कोई व्यक्ति कम से कम छह साल का प्राथमिक सदस्य होना चाहिए, ताकि उसे इस पद की जिम्मेदारी दी जा सके। लेकिन जसमंत जाटव ने मार्च 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी, और उनका पार्टी में सदस्य बनने का समय अभी चार साल ही हुआ है। इसके बावजूद उन्हें अध्यक्ष बनाने का निर्णय पार्टी द्वारा लिया गया, जो बीजेपी के अपने ही संविधान के खिलाफ जाता है।

यह कदम उस समय उठाया गया जब बीजेपी ने सिंधिया के करीबी नेताओं को अपनी पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर बैठाने की रणनीति अपनाई है। सिंधिया की पसंद और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, पार्टी ने यह फैसला लिया है, जिससे पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और संविधान के उल्लंघन की चर्चा हो रही है।
क्षत्रपों की पसंद को प्राथमिकता
बीजेपी ने अब तक 20 जिलों के जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा की है। इन चयनित अध्यक्षों में ज्यादातर सीएम डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की पसंद को प्राथमिकता दी गई है। उदाहरण के लिए, सीएम डॉ मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन शहर में संजय अग्रवाल को अध्यक्ष बनाया गया है, जो कि सीएम के करीबी माने जाते हैं। इसी तरह से, विदिशा जिले में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद के अनुसार महाराज सिंह दांगी को अध्यक्ष बनाया गया है।
इसके अलावा, वीडी शर्मा के खजुराहो संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पन्ना और छतरपुर जिलों में पिछले अध्यक्षों को ही रिपीट किया गया है, जो उनके राजनीतिक समीकरण को मजबूत करने की ओर इशारा करते हैं।
बीजेपी में 9 जिलों के जिला अध्यक्षों का रिपीट: नए चेहरों के बीच पुराने नेतृत्व का भी जारी रहना
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाल ही में 18 जिलों के जिला अध्यक्षों की घोषणा की है। इस सूची में एक दिलचस्प पहलू यह है कि 9 जिलों में पुराने जिला अध्यक्षों को ही फिर से जिलों की कमान दी गई है। यह संकेत देता है कि पार्टी अपने पुराने नेताओं के अनुभव और उनके कड़े नेतृत्व को बरकरार रखना चाहती है, वहीं नए चेहरों के लिए भी मौके दिए गए हैं।
कौन से जिले हैं जिनमें अध्यक्ष रिपीट हुए हैं?
सोमवार रात जारी किए गए 18 जिलों के अध्यक्षों में निम्नलिखित 9 जिलों में पहले से मौजूद जिला अध्यक्षों को फिर से कमान दी गई है:
- रतलाम - प्रदीप उपाध्याय
- बुरहानपुर - मनोज माने
- हरदा - राजेश वर्मा
- मैहर - कमलेश सुहाने
- मऊगंज - राजेंद्र मिश्रा
- पन्ना - बृजेंद्र मिश्रा
- छतरपुर - चंद्रभान सिंह गौतम
- अशोकनगर - आलोक तिवारी
- गुना - धर्मेंद्र सिकरवार
इन जिलों में नेतृत्व का रिपीट होना दर्शाता है कि पार्टी को इन नेताओं पर विश्वास है और वे पार्टी के विस्तार और कार्यकुशलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी ने इन जिलों में पिछले कार्यकाल में अच्छे प्रदर्शन और नेतृत्व की समीक्षा की है, जो उनके पुनर्नियुक्ति का कारण बना है।












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