MP News: भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का विपक्ष पर हमला, भारत बंद को लेकर की कड़ी आलोचना
Bhopal News: पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के प्रमुख आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते ने भारत बंद के संदर्भ में विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने इस पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया था।
कुलस्ते, जो मध्य प्रदेश की मंडला (ST) लोकसभा सीट से सांसद हैं, ने भोपाल में मीडिया से बात करते हुए कहा, "न्यायाधीशों ने अपनी राय दी है। मैं व्यक्तिगत रूप से 60-70 सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला था। पीएम ने हमें आश्वस्त किया था कि एससी और एसटी के बीच क्रीमी लेयर प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा।"

उन्होंने आगे बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी इस मामले में फैसला लिया है कि 'शीर्ष अदालत की राय' को लागू नहीं किया जाएगा। कुलस्ते ने जोर देते हुए कहा कि सरकार की इतनी स्पष्टता और निर्णय के बावजूद भारत बंद का आह्वान किया जाना केवल राजनीतिक मंशा को दर्शाता है।
कुलस्ते ने कांग्रेस और बीएसपी प्रमुख मायावती पर भी निशाना साधा, कहा कि कांग्रेस और मायावती एससी और एसटी के नाम पर राजनीति कर रही हैं। उनके अनुसार, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए भुनाने का प्रयास किया है, जो कि उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। कुलस्ते की इस टिप्पणी ने भारत बंद के मुद्दे पर राजनीतिक बहस को और भी गरम कर दिया है।
बता दे देशभर के 21 संगठनों ने आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त के फैसले के खिलाफ आज भारत बंद का आह्वान किया है। संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए दावा किया है कि इससे आरक्षण के मूल सिद्धांतों को खतरा पैदा होगा।

21 संगठनों का भारत बंद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को अपने फैसले में कहा था कि राज्यों को सामाजिक रूप से विषम वर्ग बनाने वाली अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है। यह उप-वर्गीकरण उन जातियों के उत्थान के लिए किया जाएगा जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह उप-वर्गीकरण पिछड़ेपन और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के ''मात्रात्मक और प्रदर्शन योग्य आंकड़ों के आधार पर'' होना चाहिए, न कि सनक या राजनीतिक लाभ के आधार पर।
संगठनों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आरक्षण की मूल भावना और उद्देश्यों को कमजोर कर देगा। उनका कहना है कि इससे उन जातियों को नुकसान होगा जिन्हें वास्तव में आरक्षण की जरूरत है। इसके विरोध में आज का भारत बंद इस बात का संकेत है कि कई संगठन और समुदाय इस निर्णय के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद और चिराग पासवान का बयान
अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण में क्रीमी लेयर के प्रावधान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ दलित और आदिवासी संगठनों ने आज भारत बंद का आह्वान किया। इस आंदोलन में भीम आर्मी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद भी शामिल हुए। चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र सरकार को आरक्षण विरोधी करार देते हुए कहा कि आंदोलन का अगला चरण 11 सितंबर को होगा, जिसमें वह सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे।
चंद्रशेखर आजाद ने भारत बंद के दौरान अपने संबोधन में कहा, "सरकार ने हमारे अधिकारों को कमतर करने की कोशिश की है। हम आरक्षण के अधिकार की रक्षा के लिए सड़कों पर हैं और अगले चरण में सरकार को इस मुद्दे पर झुकने पर मजबूर करेंगे।"
वहीं इस बीच, केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भारत बंद का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा, "मैं आश्वस्त करता हूं कि जब तक मैं हूं, आरक्षण में किसी भी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है। हम अपने पक्ष को लेकर पूरी तरह से स्पष्ट हैं।"
चिराग पासवान ने आगे बताया कि उनकी पार्टी और वे स्वयं अनुसूचित जाति और जनजाति के पक्ष में नैतिक समर्थन करते हैं और किसी भी प्रकार के संशोधन या बदलाव का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की नीतियाँ दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।












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