MP News: फलोदी सट्टा बाजार के रुझानों में दिख रहे कांटे की टक्कर को लेकर भाजपा कांग्रेस दोनों अलर्ट
MP Election 2023 News: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए हुई वोटिंग के बाद फलोदी सट्टा बाजार के रुझानों ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी। दरअसल, फलोदी सट्टा बाजार दोनों ही पार्टियों को कांटे की टक्कर में दिख रहा है। ऐसे में अगर परिणाम पिछले विधानसभा चुनाव की तरह हुए तो किसी भी डाल को सरकार बनाने के लिए जदोहद करनी पड़ सकती है। इसके लिए दोनों ही दलों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी।
विधानसभा चुनाव में सत्ता पाने के लिए मैजिक फिगर से यदि दोनों ही दल कुछ दूर रहे तो उनके अपने ही पार्टी के बागी फिर से दोस्त बन सकते हैं। दरअसल, साल 2018 के चुनाव में दोनों ही दाल सत्ता के लिए जरूरी 116 सीटों के आंकड़े तक नहीं पहुंच नहीं सके थे। राजनीतिक विश्लेषको और फलोदी सट्टा बाजार के भाव से प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा में कांटे की टक्कर बताई जा रही है। अब ऊंट किस करवट बैठा है, यह तो 3 दिसंबर को परिणाम सामने आने के बाद ही पता चल सकेगा।

कांग्रेस को 116 से 119 सीट !
फलोदी सट्टा बाजार के अनुमान के मुताबिक मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। बाजार के अनुसार मध्यप्रदेश में कांग्रेस को 116 से 119 सीट तथा भाजपा को 106 से 109 सीट मिलना बता रहे है। इसी तरह छतीसगढ़ में कांग्रेस को 50 से 52 सीट तथा भाजपा को 37 से 39 सीट मिलना बता रहे है।
फलोदी सटटा बाजार के एक ब्रोकर (दलाल) ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बाजार में लगातार प्रदेश में किसकी सराकार बनेगी इसे लेकर ट्रेंड तेजी से इधर-उधर हो रहा है। बताया जा रहा है कि बाजार में अभी 55/45 का भाव चल रहा है। कांग्रेस पर 45 भाजपा 55 रूपये का भाव आ रहा है।
(Oneindia Hindi इस तरह के किसी सट्टा बाजार और सटोरियों पर ना तो भरोसा करता है और न ही इसकी पुष्टि करता है)
प्लान-B जैसी तैयारी
कांटे की टक्कर की संभावना के चलते दोनों ही दल प्लान- B जैसी तैयारी कर रहे हैं। जैसे-जैसे परिणाम की तारीख पास आती जा रही है। वैसे-वैसे बीजेपी और कांग्रेस के साथ ही आम आदमी भी जीत-हार का गुणा भाग करने में लगा हुआ है। यदि साल 2018 की स्थिति फिर बनी तो उसकी तत्काल हल निकालने के लिए दोनों ही पार्टी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने ही प्लान-बी तैयार करना शुरू कर दिया है।
जरूरत पड़ने पर बागियों को साथ ले सकती है कांग्रेस
कांग्रेस का भी सत्ता को लेकर प्लान तैयार है। कांग्रेस इस बार पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए सरकार बनने पर पूरा फोकस करेगी। इसलिए वे कई तरह से प्लान बना रही है। चुनाव जीतकर आने वाले बागी नेताओं पर इसका फोकस तो रहेगा ही, साथ ही सत्ता पाने के लिए उसकी भाजपा से टक्कर वाली स्थिति बनी तो अपने विधायकों को सुरक्षित राज्य में भेजने के लिए अभी से प्लान तैयार किया जा रहा है।
कांग्रेस के ये नेता हुए बागी
महू से पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार, गोटेगांव से शेखर चौधरी, आलोट से पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, सिवनी मालवा ओम रघुवंशी, धार से कुलदीप बुंदेला, बडनगर से राजेंद्र सोलंकी, मल्हारगढ़ से श्यामलाल जोकचंद, जतारा से आरआर बंसल नागौर से यादवेंद्र सिंह।
जरूरत पड़ने पर भाजपा भी बागियों का साथ ले सकती है बीजेपी
मुरैना से बसवा प्रत्याशी राकेश उत्तम सिंह, सीधी से केदारनाथ शुक्ला, लहार से बसपा प्रत्याशी रसाल लाल सिंह, चाचौड़ा से आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी ममता मीना, भिंड से बसपा प्रत्याशी संजीव कुशवाहा, टीकमगढ़ से केके श्रीवास्तव, राजनगर से बसपा प्रत्याशी घासीराम पटेल, बुरहानपुर से हर्ष चौहान, जोबट से माधव सिंह डाबर होशंगाबाद से भगवती चौरे, भाजपा से बागी होकर चुनावी मैदान में उतरे थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2018 की गलतियों से सबक लेकर रणनीतिकार संभावनाओं को लेकर पहले से ही तैयारी कर रहे हैं। यदि सरकार बनने के लिए बहुमत से कुछ सदस्य कम हुए तो भारतीय जनता पार्टी निर्दलीय या बसपा या दूसरे दलों से जीते विधायकों का समर्थन ले सकती है। इसके लिए भाजपा की तरफ से भी प्लान तैयार किया जा रहा है फिलहाल पार्टी पार्टी का कोई नेता इस पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।












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