भोपाल: कोरोना से मौत के सरकारी आंकड़ों में बड़ा हेरफेर, रिकॉर्ड में 109 लेकिन हुए 2500 से ज्यादा दाह संस्कार
भोपाल, मई 3: कोरोना का आतंक देश के हर हिस्से में फैला हुआ है। अस्पतालों में मरीज लगातार दम तोड़ रहे हैं। इलाज और ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की सांसें उखड़ रही है। कोरोना की दूसरी लहर ने मध्य प्रदेश का भी बहुत बुरा किया हुआ है और राजधानी भोपाल की स्थिति तो काबू से बाहर होती जा रहा है। भोपाल में रोजाना सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है, लेकिन सरकारी आंकड़ों में 'कमी' दिखाई जा रही है। सीधे शब्दों में कहे तो भोपाल में मौत के सरकारी आंकड़ों में जमीन और आसमान का अंतर है।

भोपाल के प्रशासन की मानें तो अप्रैल महीने के अंदर जिले में कोरोना वायरस से 109 लोगों की मौत हुई हैं, जो सरकारी आंकड़े है। लेकिन श्मशान घाट और कब्रिस्तान के आंकड़े सरकारी आंकड़ों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। जिले में कोविड मृत्यु के लिए नामित तीन शमशान घाट और एक कब्रिस्तान हैं। इंडियन एक्सप्रेस के एक्सेस किए गए रिकॉर्ड बताते हैं कि 1 से 30 अप्रैल तक 109 के अलावा 2,567 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। वहीं रिकॉर्ड बताते है कि इन चारों स्थानों पर इस अवधि के दौरान 1,273 गैर कोविड मरीजों का भी दाह संस्कार किया गया है।
कुल मिलाकर भोपाल में 6 श्मशान और 4 कब्रिस्तान हैं, जिसमें से जिसमें चार श्मशान घाट और एक कब्रिस्तान को कोविड मरीजों के लिए रखा गया है। इस दौरान कब्रिस्तान और शमशान के अधिकारियों ने बताया कि शवों की भीड़ से निपटने के लिए वो लोग संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां दस्ताने और पीपीई किट चारों ओर बिखरे पड़े रहते हैं और हमारे कर्मचारी इस दौरान काम करते हैं। नगर निगम को कम से कम श्मशान भूमि की साफ-सफाई को सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा उनकी शिकायत है कि श्मशान घाटों और कब्रिस्तान में काम करने वाले लोग की संख्या कम हैं।
वहीं तीन श्मशान और कब्रिस्तान में दर्ज मौत के आंकड़ों के बारे में पूछे जाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बताया कि राज्य में सरकार की ओर से मौतों का आंकड़ा नहीं छिपाया जा रहा है। शायद कई संदिग्ध मामले हैं, जिनका कोविड प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार किया गया है। इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।












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