Bhojshala ASI Survey पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, खुदाई को लेकर दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार के विवादित स्थल भोजशाला और कमल मौला मस्जिद में एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को विवादित स्थल "भोजशाला और कमल मौला मस्जिद" में सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम निर्देश में कहा है कि, सर्वेक्षण के नतीजे के आधार पर उसकी अनुमति के बिना कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, विवादित स्थलों पर कोई भौतिक खुदाई नहीं की जानी चाहिए, जिससे इसका स्वरूप बदल जाएगा।

कुछ ऐसा है पूरा मामला
धार स्थित भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा एक आवेदन हाईकोर्ट में दिया गया था, जिस पर सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद फरवरी में हाईकोर्ट की ओर से फैसले को सुरक्षित रख लिया गया था, वहीं अब हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ की ओर से एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया गया है।
धार स्थित भोजशाला में माता सरस्वती का बेहद प्राचीन मंदिर स्थित है, जहां हर साल वसंती पंचमी धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, इसी के साथ यहां वसंत पंचमी के अलावा त्योहारो पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। यहां वसंत पंचमी के साथ-साथ शुक्रवार को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहते हैं. भोजशाला का विवाद सदियों पुराना है। लोगों का मानना है की, सदियों पहले यहां आक्रमणकारियों ने आक्रमण कर मजार बनवाई थी, यहां आज भी देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत भाषा में श्लोक लिखे हुए हैं।
हिंदू पक्ष से जुड़े वकीलों ने बताया था कि, हिंदू समाज और भोज उत्सव समिति के नेतृत्व में आंदोलन जारी था, जिसमें हिंदू पक्ष की बड़ी जीत हुई है, हिंदू पक्ष की ओर से एक आवेदन न्यायालय के समक्ष लगाया गया था की भोजशाला का सर्वे और सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष रखी जाए, और फिर तय किया जाए की यहां की भौगोलिक स्थिति क्या थी, 19 जनवरी को इस मामले में विस्तृत तर्क हुआ था, जिसके बाद न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रखा था, न्यायालय ने आदेश दिया है की, एक पांच सदस्यी कमेटी बनेगी और वह छ: सप्ताह के अंदर, यहां सर्वे करवाकर के न्यायालय के पटल पर छ: सप्ताह में पेश करेगी।
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