MP News: जानिए कैसे खंडवा में कुएं की सफाई के दौरान जहरीली गैस से 8 की मौत, गांव में पसरा सन्नाटा
MP News: खंडवा जिले के कोंडावत गांव में गुरुवार शाम एक दिल दहला देने वाली त्रासदी ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। गणगौर विसर्जन के लिए एक कुएं की सफाई करते समय जहरीली गैस ने आठ लोगों की जान ले ली।
यह भयानक हादसा उस वक्त हुआ, जब गणगौर उत्सव के लिए कुएं को साफ करने उतरे एक युवक की जहरीली गैस की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई, और फिर उसे बचाने की कोशिश में एक-एक कर सात और लोग भी दम तोड़ गए।

सफाई का इरादा, मौत का मंजर
यह त्रासदी तब शुरू हुई, जब कोंडावत गांव के अर्जुन पटेल (35) ने गणगौर के विसर्जन के लिए कुएं की सफाई करने का फैसला लिया। बताया जा रहा है कि यह कुआं लंबे समय से प्रयोग में नहीं था और इसके किनारे से आने वाली गंदगी और नाली की अव्यवस्था ने इसे दलदल में बदल दिया था। जैसे ही अर्जुन कुएं में उतरे, जहरीली गैस ने उन्हें बेहोश कर दिया, और वह दलदल में गिर गए। उनकी चीखें सुनकर गांव वाले उन्हें बचाने के लिए कुएं में कूद पड़े, लेकिन अफसोस, कोई भी बचाव के प्रयास सफल नहीं हो सके।
मरने वालों में शामिल हैं:
- राकेश (21), पिता हरी पटेल
- वासुदेव (40), पिता आसाराम पटेल
- अर्जुन (35), पिता गोविंद पटेल
- गजानंद (35), पिता गोपाल पटेल
- मोहन (48), पिता मंसाराम पटेल
- अजय (25), पिता मोहन पटेल
- शरण (40), पिता सुखराम पटेल
- अनिल (28), पिता आत्माराम पटेल
रेस्क्यू ऑपरेशन: तीन घंटे की कड़ी मशक्कत
ग्रामीणों ने पहले अपनी ओर से बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन जहरीली गैस के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई। फिर पुलिस और प्रशासन को सूचित किया गया और खंडवा पुलिस, जिला प्रशासन, और स्टेट डिजास्टर इमरजेंसी रिस्पांस फोर्स (SDERF) की 15 सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंची। करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में रस्सियों और जाल की मदद से कुएं से एक-एक कर सभी शवों को बाहर निकाला गया। सबसे आखिरी में अर्जुन का शव निकाला गया, जो इस हादसे का पहला शिकार था।
जहरीली गैस का कहर
प्रशासन का मानना है कि कुएं में जहरीली गैस, संभवतः मीथेन या हाइड्रोजन सल्फाइड, जमा हो गई थी। लंबे समय तक न इस्तेमाल होने की वजह से कुएं में गंदगी और दलदल जमा हो गया था, जिससे गैस का निर्माण हुआ। इस गैस ने जैसे ही अर्जुन को बेहोश किया, बाकी लोग भी उसे बचाने के चक्कर में इसकी चपेट में आ गए और उनकी जानें चली गईं।
प्रशासन की मदद: 4-4 लाख की आर्थिक सहायता
हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और एसपी मनोज कुमार राय ने घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। एसपी राय ने कहा, "यह एक बेहद दुखद घटना है। जहरीली गैस के कारण यह हादसा हुआ है। हम जांच करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।"
गांव में पसरा सन्नाटा और सवाल
कोंडावत गांव अब सन्नाटे में डूबा हुआ है। वह कुआं, जो कभी उत्सव का हिस्सा बनने वाला था, अब आठ परिवारों के लिए दुख और शोक का कारण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुएं की हालत पहले से खराब थी, लेकिन उसे साफ करने की आवश्यकता समझी गई। एक बुजुर्ग ने आंखों में आंसू भरकर कहा, "हमारे बच्चे एक-दूसरे को बचाने गए, लेकिन सभी चले गए। अब कौन हमारा सहारा बनेगा?" इस हादसे ने सुरक्षा मानकों और जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था?
सोशल मीडिया पर शोक की लहर
सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैल गई और लोगों ने #KhandwaTragedy के तहत शोक व्यक्त किया। एक यूजर ने लिखा, "गणगौर का उत्सव मातम में बदल गया। सरकार को ऐसी जगहों पर सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।" इस हादसे ने न केवल खंडवा, बल्कि पूरे प्रदेश में सुरक्षा के मानकों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी पर गहरा सवाल खड़ा किया है।
मामला आगे की जांच के अधीन
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। अब यह देखना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है। कोंडावत गांव की यह त्रासदी पूरी दुनिया के सामने एक चेतावनी है कि ऐसे जलस्रोतों की सफाई और उन्हें लेकर जागरूकता की आवश्यकता है।












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