गाजियाबाद में डिटेंशन सेंटर बनाने का फैसला योगी सरकार ने लिया वापस, मायावती ने किया था विरोध
लखनऊ। गाजियाबाद में बनने वाले डिटेंशन सेंटर के मसले पर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बैकफुट पर आ गई। दरअसल, 17 सितंबर को योगी सरकार ने गाजियाबाद में पहले डिटेंशन सेंटर बनाने की मंजूरी दी थी। जिसके बाद बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने दलित और आदिवासी छात्रों के लिए बने हॉस्टल को डिटेंशन सेंटर में तब्दील किए जाने का विरोध किया था। जिसके बाद ऐसी खबर आ रही है कि सरकार की ओर से अब इस फैसले को वापस ले लिया गया है।

आज तक की खबर के मुताबिक, गाजियाबाद में बनने वाले डिटेंशन सेंटर को हाल ही में योगी सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश के बाद मंजूरी दी थी, जिसका निर्माण राज्य सरकार के समाज कल्याण द्वारा किया जाना था। डिटेंशन सेंटर को मंजूरी मिलने के बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इसका विरोध किया था। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए ट्वीट किया था।
गुरुवार को किए अपने ट्वीट में मायावती ने लिखा था, 'गाजियाबाद में बीएसपी सरकार द्वारा निर्मित बहुमंजिला डॉ. अंबेडकर एससी/एसटी छात्र हॉस्टल को 'अवैध विदेशियों' के लिए यूपी के पहले डिटेंशन सेंटर के रूप में कनवर्ट करना अति-दुःखद व अति-निन्दनीय। यह सरकार की दलित-विरोधी कार्यशैली का एक और प्रमाण। सरकार इसे वापस ले बीएसपी की यह मांग।' इस डिटेंशन सेंटर को लेकर ये जानकारी सामने आई थी कि गाजियाबाद के नंदग्राम में दलित छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग दो छात्रावास बने थे। इनमें से एक हॉस्टल को डिटेंशन सेंटर में तब्दील किया गया था।
क्या होता है डिटेंशन सेंटर?
डिटेंशन सेंटर में फॉरेनर्स एक्ट, पासपोर्ट एक्ट का उल्लंघन करने वाले विदेशियों को रखा जाता है। प्रत्यर्पण न होने तक इन्हें यहीं रखा जाता है। देश में इस समय 11 डिटेंशन सेंटर हैं। असम में 6 डिटेंशन सेंटर हैं, वहीं दिल्ली, गोवा, राजस्थान, पंजाब, बेंगलुरु में भी डिटेंशन सेंटर हैं।












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