यूपी की राजनीति में इस बार कठिन है सपा-बसपा-भाजपा की राह

लखनऊ। पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद यूपी चुनाव से पहले कराए गए सर्वे ने भाजपा समर्थकों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। इस सर्वे में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में दिखाया गया है।

सर्वे में बसपा दूसरी बड़ी पार्टी

सर्वे के आंकड़ों के अनुसार यूपी में 403 में से 170-183 सीटें भाजपा को मिल सकती हैं। लेकिन इस सर्वे की सबसे बड़ी बात यह है कि सपा को प्रदेश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी व सपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है।

भीतरी कलह पर निर्भर रहना पड़ेगा भारी

भीतरी कलह पर निर्भर रहना पड़ेगा भारी

एक तरफ जहां इस सर्वे में भाजपा को 170-183 सीटें मिल रही हैं तो बसपा को 115-124 सीटें मिल रही हैं। जबकि सपा को सिर्फ 94-103 सीटें मिल रही हैं। जिस तरह से सपा की सीटों में कमी हुई है उससे साफ है कि पार्टी को भीतरी कलह का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गठबंधन की राजनीति की हो सकती है वापसी

गठबंधन की राजनीति की हो सकती है वापसी

यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं ऐसे में जिस तरह से सर्वे ने यह साफ किया है कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं हासिल हो रहा है उसने यूपी में गठबंधन की सरकार की ओर इशारा कर दिया है जिसके कयास पहले से लगाए जा रहे थे।

सपा-कांग्रेस अहम

सपा-कांग्रेस अहम

प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कई बार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ कर चुके हैं और उन्होंने कई मौकों पर राहुल का समर्थन भी किया है। खुद राहुल गांधी ने भी अखिलेश की तारीफ की है। ऐसे में दोनों ही पार्टियां एक दूसरे के साथ गठबंधन के विकल्प को खुला रखा है। वहीं प्रदेश में दूसरे समीकरणों पर नजर डालें तो भाजपा ने सपा और बसपा दोनों ही पार्टियों पर काफी हमले बोले हैं, लेकिन मुलायम सिंह यादव की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में पैठ और बिहार चुनाव से ऐन वक्त पर महागठबंधन से बाहर होकर भाजपा को फौरी राहत दी थी।

किस ओर करवट लेंगी मायावती

किस ओर करवट लेंगी मायावती

मायावती ने हाल ही में लखनऊ की रैली में साफ किया है कि लोग यह अफवाह फैला सकते हैं कि बसपा भाजपा के साथ गठबंधन कर सकती है लेकिन आप लोगों को इस तरह के षड़यंत्र से दूर रहना है।

खरीद-फरोक्त के दौर की वापसी की आशंका

खरीद-फरोक्त के दौर की वापसी की आशंका

ऐसे में जिस तरह से प्रदेश में तीनों अहम दल एक दूसरे से समीकरण बना रहे हैं उसे देखते हुए इस बात के कयास लगाए जा सकते हैं कि प्रदेश में सीटों की खरीद फरोख्त और दल बदल का सिलसिला चुनाव समर में बढ़ेगा।

सपा-बसपा से पार पाना भाजपा के लिए चुनौती

सपा-बसपा से पार पाना भाजपा के लिए चुनौती

उत्तर प्रदेश की सत्ता से कांग्रेस जहां 27 साल से बाहर है तो भाजपा को प्रदेश की सत्ता से दूर हुए एक दशक से ज्यादा का समय हो गया है। यूपी में भाजपा ने पहली बार 1993 में चुनाव लड़ा था और 177 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि सपा को 109 व बसपा को 67 सीट मिली थी।हालांकि उस दौरान सपा और बसपा साथ आए थे और गठबंधन की सरकार चली लेकिन बसपा के इस गठबंधन से बाहर आने के बाद मायावती ने भाजपा के साथ सरकार बनाई लेकिन यह गठबंधन भी ज्यादा समय तक नहीं चला।

इतिहास से सबक लेने की जरूरत

इतिहास से सबक लेने की जरूरत

1996 में भी एक बार फिर से त्रिशंकु सरकार बनी और मायावती ने छह महीने के शासन काल के बाद भाजपा से समर्थन वापस ले लिया था। हालांकि कल्याण सिंह ने कई विधायकों को तोड़कर अपनी सरकार को 2002 तक चलाया लेकिन यह भाजपा के लिए आखिरी सत्ता का साल साबित हुआ।

त्रिशंकु विधानसभा के आसार

त्रिशंकु विधानसभा के आसार

2002 के बाद से यूपी में सपा और बसपा एक के बाद एक पूर्ण बहुमत से सरकार बना रही हैं। लेकिन जिस तरह से 2014 के चुनाव में भाजपा ने यूपी में जबरदस्त प्रदर्शन किया उसने एक बार फिर से प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा के आसार जगा दिए हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा लेकिन अगर प्रदेश में त्रिशंकु विधानसभा होती है तो प्रदेश के सियासी इतिहास को देखते हुए यह काफी कठिन डगर लगती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+