कुमार का विवादास्पद 'सेंस ऑफ ह्यूमर'

इससे पहले 44 साल के विश्वास ने आरएसएस की ‘अनुशासित संगठन' के तौर प्रशंसा करते हुए कह दिया था कि 'अगर कोई संगठन बहुसंख्यक के लिए बात करता है तो इसका यह मतलब नहीं कि वह सांप्रदायिक है।' उनके इस बयान को लेकर कुछ मुस्लिम संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई थी और उन्हें पार्टी से बाहर निकालने की मांग की थी।
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अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कुमार ने कहा, 'मैंने कहा था कि आरएसएस का अनुशासन बहुत अच्छा है। लश्कर-ए-तैयबा का अनुशासन भी बहुत अच्छा है। लोग मरने के लिए तैयार हैं। अनुशासन उनसे सीखिए..हिंदू राष्ट्रवाद उनसे मत सीखिए।'
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह सभी विचारों के लोगों से अच्छी चीजें ग्रहण करने में यकीन करते हैं, लेकिन आरएसएस के हिंदू राष्ट्रवाद के विचार से वह सहमत नहीं है। कुमार समय-समय पर भगवा दलों को घेरते आए हैं। हालांकि कुमार के दशक पहले के बयानों में भाजपा का पक्ष भी देखने को मिलता है। विश्वास ने कई कवि सम्मेलनों में भाजपा व मोदी के कसीदे पढ़े हैं।












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