UP: मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज, सीएम योगी जल्द कर सकते हैं पुनर्गठन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे करीब आ रहे हैं। चुनाव की आहट के साथ ही मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी मंत्रिपरिषद का जल्द पुनर्गठन कर सकते हैं। बीते दिनों दो मंत्रियों कमल रानी और चेतन चौहान के कोरोना संक्रमण से निधन के बाद इन मंत्रियों के विभाग फिलहाल किसी को आवंटित नहीं किए गए हैं। मंत्रिपरिषद में फेरबदल के दौरान इन मंत्रियों के स्थान पर भी नए चेहरों को जगह मिल सकती है।

मंत्रिपरिषद में छह स्थान खाली
सूत्रों के मुताबिक, कोरोना महामारी की वजह से मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन में देरी हुई है। स्थिति थोड़ी सामान्य होते ही मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन तय माया जा रहा है। विधायकों की संख्या के हिसाब से मंत्रिपरिषद में 60 सदस्य हो सकते हैं। अभी तक 56 सदस्यीय मंत्रिपरिषद थी। हाल ही में प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमलरानी वरुण व होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान की कोरोना से मृत्यु के बाद यह संख्या 54 रह गई है। मंत्रिपरिषद में छह स्थान खाली हैं। कुछ मंत्री ऐसे भी जो अपना विभाग बदलवाना चाहते हैं। वहीं, कुछ मंत्री अपने परफॉर्मेंस की वजह से किनारे किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, 75 साल की उम्र के आधार पर भी मंत्रियों की छटनी हो सकती है। यही नहीं कुछ मंत्रियों का कामकाज कमजोर माना जा रहा है, जिसके बाद उनका विभाग बदले जाने की अटकलें हैं।
विधायकों की नाराजगी की जा सकती है दूर
उधर, विधायकों की नाराजगी कम करने के लिए उनके समायोजन पर भी चर्चा चल रही है। दरअसल, बीते महीनों में पुलिस व प्रशासन के रवैये से विधायकों की नाराजगी सामने आ चुकी है। इस नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। संकेत हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा असंतुष्ट विधायकों का समायोजन कर सकती है। पार्टी अपने कुछ विधायकों को बोर्ड, निगम और आयोग में पद देने दे सकती है। वहीं, कुछ विधायकों को मंत्रिपरिषद में भी मौका मिल सकता है। यही नहीं, कुछ पदाधिकारियों को हटाकर नए चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक आयोग सहित अन्य कुछ संस्थाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों के पद रिक्त हैं। बीज विकास निगम सहित कुछ निगमों व बोर्डों में भी पद खाली हैं।
ये पद भी हैं खाली
पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाए जाने के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का पद भी रिक्त है। इसके अलावा अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति आयोग सहित कुछ अन्य संस्थाओं में उपाध्यक्षों व सदस्यों का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है। इन पर भाजपा के लोगों को समायोजित किया जा सकता है। भाजपा के कुछ सीनियर लीडर्स की मानें तो पार्टी की चिंता का प्रमुख कारण इन घटनाओं से पार्टी की अनुशासनात्मक छवि का दरकना है। ऐसे में विधायकों के सम्मान व महत्व का संदेश देना जरूरी हो गया है।












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