एक बच्चे वाली महिलाओं को एक लाख रुपए देगी योगी सरकार, लॉ कमीशन ने CM को सौंपा जनसंख्या नियंत्रण कानून का मसौदा

लखनऊ, 17 अगस्त: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले जनसंख्या नियंत्रण बिल लागू किए जाने की अटकलों के बीच यूपी लॉ कमिशन ने सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ को जनसंख्या नियंत्रण कानून से जुड़े बिल का मसौदा सौंप दिया। आयोग का दावा है कि इस मौसदे में संसोधन को लेकर 8500 सुझाव प्राप्त हुए थे, इन प्रस्तावों पर मंथन करने के बाद ही फाइनल रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस मसौदे में खास बात यह है कि ये यदि सरकारी कर्मचारी इसका उल्लंघन करता है तो उसकी नौकरी भी चली जाएगी। साथ ही आयोग ने अपनी रिपोर्ट में महिलाओं को स्वेच्छा से नसबंदी कराने के लिए प्रेरित करने के लिए भी सुझाव दिया है और कहा है कि जो महिलाएं 45 वर्ष तक एक ही बच्चा रखेंगी उन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर सरकार एक लाभ रुपए देगी।

UP Law Commission handed over draft of population control law bill to CM Yogi

हालांकि बताया जा रहा है कि इस मसौदे को इसी विधानसभा सत्र में पेश किया जा सकता है और 17 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में सीएम आदित्यनाथ इस बिल को पेश कर सकते हैं। लोगों से मिले सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में संशोधन करके अंतिम प्रारूम तैयार किया गया। हालांकि विपक्ष लगातार यह बात कह रहा है कि यह मसौदा एक खास वर्ग को परेशान करने के लिए लाया गया है और वो इसका विरोध करेंगे।

दो बच्चे वालों को ग्रीन और एक बच्चे वालों को गोल्ड कार्ड
आयोग को भेजे गए सुझावों में कई लोगों ने दो के स्थान पर अधिकतम तीन बच्चों के लिए कानून बनाए जाने की बात भी कही है। हालांकि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस मामले को लेकर कुछ नहीं कहा है। आयोग ने कहा है कि दो बच्चे वालों को ग्रीन और एक बच्चे वाले को गोल्ड कार्ड दिया जाएगा ताकि उसे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार बार अपने दस्तावेज न दिखाने पड़ें। हालांकि आयोग ने यह छूट दी है कि यदि दो बच्चों में एक ट्रांसजेंडर होगा तो तीसरे बच्चे की छूट दी जाएगी।

दो से कम बच्चे होंगे तो मिलेंगी अधिक सुविधाएं
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दो ही बच्चों तक परिवार सीमित करने वाले जो अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं और स्वैच्छिक नसबंदी करवाते हैं तो उन्हें दो अतिरिक्त इंक्रिमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट, पीएफ में नियोक्ता योगदान बढ़ाने जैसी कई सुविधाएं दी जाएंगी। जबकि स्वैच्छिक नसबंदी कराने वाले अभिभावकों को 20 साल तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा, शिक्षण संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी।

हालांकि इस मसौदे को लेकर सपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि सरकार चुनाव से पहले जानबूझकर माहौल खराब करना चाहती है। यूपी में जनसंख्या नियंत्रण कानून का कोई औचित्य नहीं था। इसे लेकर आने की इतनी जल्दी सरकार को क्यों है यह समझ से परे हैं। एक विशेष समुदाय को टारगेट करने के लिए सरकार इस तरह के फैसले ले रही है ताकि जनहित से जुडे़ मुद्दों से उसका ध्यान भटकाया जा सके।

सरकारी कर्मचरियों के लिए खतरे की घंटी
आयोग ने यूपी सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कई सख्त हिदायतें भी दी हैं। मसौदे के अनुसार यदि कानून लागू हुआ तो सभी कर्मचारियों- अधिकारियों एवं स्थानीय निकायों में चुने गए प्रतिनिधियों को एक साल के भीतर एक हलफनामा देना होगा कि वो जनसंख्या नियंत्रण कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे। कानून लागू होने के बाद यदि वो तीसरा बच्च पैदा करते हैं तो उनका प्रमोशन रोकने और उन्हें बर्खास्त करने तक की बात कही गई है। वहीं जन प्रतिनिधियों के चुनाव रद्द करने और भविष्य में चुनाव न लड़ने पर रोक लग जाएगी।

वहीं इस मामले को लेकर राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि यदि सरकार सरकारी कर्मचारियों से शपथ पत्र लेने जैसी बात कह रही है और मसौदे में है तो यह तो तानाशाही की पुनरावृत्ति हो रही है। यूपी में पहले दो बच्चे वाले अभिभावकों को प्रोत्साहन राशि मिलती थी लेकिन इसे तो इसी सरकार ने समाप्त किया था। मसौदे में शपथ पत्र और नौकरी से बर्खास्तगी तक की बात करना बेहद निंदनीय है और यदि इस तरह का कोई कानून बनाया गया तो कर्मचारी महासंघ इसका पुरजोर विरोध करेगा।

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