अयोध्या ही नहीं गोरखपुर से भी हिंदुत्व के एजेंडे को धार देगी बीजेपी, जानिए इसकी वजहें
लखनऊ, 16 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। अयोध्या और अमथुरा से चुनाव लड़ने की अटकलों पर विराम लगाते हुए बीजेपी ने सीएम योगी को गोरखपुर शहर से टिकट दिया है। बीजेपी के रणनीतिकारों की माने तो सिर्फ अयोध्या ही नहीं गोरक्ष पीठ से भी बीजेपी अपने हिंदुत्व के एजेंडे को धार दे सकती है है और इसका असर गोरक्ष प्रांत के 10 जिलों की लगभग 60 सीटों पर पड़ेगा। रोचक यह भी है की यूपी के इतिहास में 19 साल बाद कोई सीएम विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहा है। इसे पहले 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव गुनौर सीट से चुनाव लड़े थे।

क्या कहते हैं जानकार ?
राम मंदिर आंदोलन में गोरक्ष पीठ की भुला काफी महत्वपूर्ण रही है। जानकार बताते हैं कि गोरक्ष पीठ और राम मंदिर आंदोलन को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता है। अयोध्या या फिर गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ना एक जैसा ही माना जायेगा क्योंकि दोनों को अपना अपना महत्व भी है।
सीएम योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर से चुनाव लड़ाकर बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। इसके साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान की बीजेपी छोड़ने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में माहौल बनाने के लिए बीजेपी ने यह कदम उठाया है। बीजेपी का दावा है कि सीएम योगी के गोरखपुर से उतरने का सीधा असर गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़ मंडल की 60 सीटों पर पड़ेगा। बीजेपी ने पिछले चुनाव में इनमे से 44 सीटें जीती थीं।
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योगी आदित्यनाथ की भी होगी अग्नि परीक्षा
इस बार सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में ही चुनाव लडा जा रहा है क्योंकि बीजेपी ने उनको नेता घोषित कर रखा है। लिहाजा बीजेपी यह मानकर चल रही है की इन तीन मंडलों की 60 सीटों पर इसका असर पड़ेगा। दरअसल एक समय था जब योगी आदित्यनाथ बीजेपी से बगावत करके इन्हीं सीटों में से ज्यादातर सीटों पर अपनी दावेदारी ठोकते थे। कई बार तो वो अपने समर्थित उम्मीदवारों को कई सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं, इसमें अब उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है की इन 10 जिलों में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर हो।
योगी के गोरखपुर से चुनाव लडने के सवाल पर टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते है कि, योगी के गोरखपुर से चुनाव लड़ने के पीछे बीजेपी की सोची समझी रणनीति काम कर रही है। योगी गोरक्ष पीठ के महंत भी हैं और इस पीठ की स्वीकार्यता भी इन 10 जिलों के अलावा नेपाल तक फैली है। जाहिर है पीठ के भक्तों की संख्या हर जिले में ज्यादा इसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है।

राधा मोहन ने थामा सपा का दामन तो योगी के लिए होगी मुश्किल
योगी के गोरखपुर शहर सीट से बीजेपी ने टिकट दिया है। इस सीट से बीजेपी के राधा मोहन दास लगातार चुनाव लड़ते रहे हैं। पिछले चार बार से वो यहां से विधायक थे। उनका टिकट काटना भी बीजेपी के लिए मुस्किल पैदा कर सकता है। राधा मोहन दास और योगी के बीच पुरानी अदावत रही है। योगी के विरोध के बाद भी वो कई बार चुनाव जीत चुके हैं। इस परिस्थिति में यदि राधा मोहन दास ने यदि समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया तो योगी के लिए मुस्कील हो सकती है।

अखिलेश बोले- राधा मोहन के लिए सपा के दरवाजे खुले हैं
अखिलेश यादव ने योगी को टिकट मिलने के बाद ही ऐलान किया था कि अब बीजेपी वालों के लिए सपा के दरवाजे बंद हैं लेकिन राधा मोहन के लिए अब भी सपा के दरवाजे खुले हैं। दरअसल अखिलेश यादव को इस बात का एहसास है की यदि वो राधा मोहन दास को सपने लाने में कामयाब रहे तो वो योगी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। गोरखपुर में हमेशा ही ठाकुरों और ब्राह्मणों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चलती रही है। इसी को देखते हुए गोरखपुर के माफिया हरिशंकर तिवारी का परिवार भी सपा में शामिल हो गया है। यदि राधा मोहन सपा में जाते हैं तो उन्हें हाता का समर्थन प्राप्त हो जायेगा और उनके लिए हाते से फतवा भी जारी हो सकता है और ब्राह्मणों का वोट अप के खेमे में जा सकता है।
गोरखपुर की राजनीति को करीब से समझने वाले और राष्ट्रीय सहारा के वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर तिवारी कहते हैं कि, गोरखपुर शहर से चुनाव लड़ना योगी के लिए कोई टफ टास्क नहीं है लेकिन यदि राधा मोहन दास पाला बदलेंगे तो लड़ाई दिलचस्प होगी क्योंकि इसमें गोरखपुर के पावर सेंटर *हाते* का इन्वॉल्वमेंट हो जायेगा। हाते से फतवा जारी होने पर लड़ाई टफ हो सकती है।












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