अवैध धर्मांतरण केस: UP ATS ने 6 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
लखनऊ, 20 अगस्त: उत्तर प्रदेश में एटीएस ने अवैध धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है। 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से छह आरोपियों के खिलाफ यूपी एटीएस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। एडीजी (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने शुक्रवार को बताया कि इन लोगों के खिलाफ प्राप्त साक्ष्यों से ये साबित हुआ है कि ये लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों, महिलाओं व दिव्यांगजनों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण कराते हैं। इन सभी लोगों के खिलाफ कोर्ट द्वारा अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

एटीएस द्वारा गिरफ्तार उमर गौतम, जहांगीर आलम, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, राहुल भोला उर्फ राहुल अहमद, इरफान शेख और सलाउद्दीन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। एटीएस ने आईपीसी की धारा 417, 120 बी, 153ए, 153बी, 295ए, 298 और अवैध धर्म परिवर्तन एक्ट में चार्ज शीट दाखिल की है। एटीएस ने चार्जशीट में कहा है कि इन लोगों द्वारा बड़े स्तर पर श्रंखलाबद्ध तरीको से धर्मांतरण की कार्रवाई की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत की धार्मिक जनसंख्या संतुलन को पलटकर, आपसी सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़कर लोक प्रशांति बाधित करने का काम किया जा रहा है।
चार्जशीट में इन पर गरीब, दिव्यांग, मूक-बधिर लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। कहा गया है कि इन लोगों को बहला-फुसलाकर, डराकर, बलपूर्वक और नाजायज दबाव से धर्मांतरण कराया गया। चार्जशीट में उमर गौतम, काज़ी जहांगीर पर अवैध धर्म परिवर्तन का इंटरनेशनल गिरोह चलाने का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि ये लोग धर्मांतरित लोगों को रेडिक्लाइज करते थे। इसके लिए इस्लामिक दावा सेंटर, गाजियाबाद (आईडीसी) और नोएडा डेफ सोसायटी को अवैध धर्म परिवर्तन का केंद्र बनाया गया। एटीएस के मुताबिक, देश का जनसंख्या संतुलन बिगाड़कर लोक अशांति फैलाने के भी सबूत मिले हैं। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट कस्टम की कोर्ट में ये चार्जशीट दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि अवैध धर्म परिवर्तन के लिए विदेशों में बैठे इनके सहयोगियों द्वारा भारी मात्रा में हवाला के माध्यम से उमर गौतम को पैसा भेजा जा रहा था। उमर गौतम इन पैसों को अपने गिरोह के सदस्यों को भेजता था और उसके बाद इसका इस्तेमाल अवैध धर्म परिवर्तन कराने में होता था। चार्जशीट में कहा गया कि आईडीसी ऐसा संस्थान है, जहां धर्मांतरण के शिकार लोगों का अपने अवैध नेटवर्क का प्रयोग करके झूठी सूचनाओं के आधार पर धर्मांतरण संबंधी कागजात तैयार कराए जाते थे।












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