मुझे सीएम नहीं बनना है, मेरा खून भी लेना है तो ले लो, उफ तक नहीं करुंगा- शिवपाल यादव

शिवपाल यादव ने एक बार फिर से कहा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है, मैं किसी भी त्याग के लिए तैयार हूं, अपना खून भी देने को तैयार हूं।

लखनऊ। सपा के रजत जयंती के कार्यक्रम में शिवपाल यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इशारों ही इशारों में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जितनी बार चाहो बर्खास्त करो मैं उफ तक नहीं करुंगा।

shivpal singh

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शिवपाल ने कहा कि हम स्वागत करते हैं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का, उन्होंने इस सरकार में बहुत अच्छा काम किया है और हमने भी इस सरकार में बहुत सहयोग किया है। मैं अखिलेश और समाजवादियों से कहना चाहता हूं कि जितना त्याग चाहिए ले लो, खून भी मांगो तो खून भी दे दूंगा। मुख्यमंत्री नहीं बनना है, मुझे मुख्यमंत्री कभी नहीं बनना है।

मेरे विभागों में आपके विभागों से कम काम नहीं हुआ
कितना भी मेरा अपमान कर लेना और कितनी बार भी मुझे बर्खास्त कर लेना। जो आपने मुझे जिम्मेदारी दी थी उसे मैंने पूरा किया है। पीडब्ल्यूडी विभाग में अच्छा काम हुआ है, आपके विभागों से कम अच्छा काम मेरे विभागों में नहीं हुआ है।

सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग में भी मैंने बहुत काम किया है। 80 सालों से राजस्व संहिता लागू नहीं हो पा रही थी, अधिकारियों ने भी उसमें बहुत रोड़े अटकाने का काम किया था। जो काम तीन महीने में होना चाहिए था वह अधिकारियों ने रोड़ा अटका कर सालों लगा दिए।

राजस्व विभाग के इतिहास में देख लेना, हमने दो साल के भीतर 42 नई तहसीलें बनाई हैं। मैंने सहकारी बैंक में भी बहुत काम किया है। उन्होंने कहा कि पता कर लेना मैंने साढ़े तीन लाख तालाब खोदवा दिए हैं, जिसमें लबालब पानी भरा है।

जो चाहे ले लो उफ तक नहीं करुंगा
हम जानते हैं कि हम लोगों के बीच कुछ घुसपैठिए घुस गए हैं, उनसे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो चाहो हमसे मांग लेना उफ नहीं करुंगा। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि जहां पर भी नेताजी का अपमान होगा, हम सपा के लोग यूपी के लोग बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।

कुछ लोगों को विरासत में सबकुछ मिल जाता है
शिवपाल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री जी संघर्ष के दिनों में मेरा भी संघर्ष है, बहुत जोखिम लिए हैं, खतरे भी मोल लिए हैं। मैने एक दिन कहा था तो मुख्यमंत्रीजी को बुरा लग गया था कि कुछ लोगों को भाग्य से कुछ मिल जाता है और कुछ लोगों को मेहनत से मिलता है, और कुछ लोगों को विरासत में मिल जाता है, लेकिन कुछ लोग जिंदगी भर काम करते-करते मर जाते हैं उन्हें कुछ नहीं मिलता है।

कुछ लोग चापलूसी करके सबकुछ पा लेते हैं
कुछ लोगों ने जरा सी चापलूसी कर ली है उन्हें सबकुछ मिल गया है, लेकिन कुछ लोग जिन्होंने अपनी जान दे दी उन्हें कुछ नहीं मिला। मैंने कहा था कि जितने लोहियावादी और उपेक्षित लोग हैं उन्हें एकजुट करने की जरूरत है। जितने भी बड़े लोग हैं, और अच्छ लोग हैं उन्हें इकट्ठा करेंगे।

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