राज्यसभा के लिए सपा के उम्मीदवारों की लिस्ट 2017 की तैयारी
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने जिन छह लोगों को राज्यसभा का टिकट दिया है उसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सपा के सियासी तानेबाने के रुप में देखा जा रहा है। बेनीप्रसाद वर्मा, अमर सिंह, रेवती रमण सिंह, संजय सेठ को राज्यसभा क्यों भेजा गया इसके पीछे की वजह को जानने के लिए इनके सियासी समीकरण को समझने की जरूरत है।

सपा के लिए दिल्ली के सियासी गलियारे के मैनेजर बनेंगे अमर सिंह
अमर सिंह को एक बेहतरीन सियासी मैनेजर के तौर पर जाना जाता है। जिस तरह से अमर सिंह दिल्ली की राजनीति में बेहतर पकड़ रखते हैं और उनका जबरदस्त नेटवर्क है उसकी सपा को काफी जरूरत थी। मुलायम सिंह इस बात को बेहतर समझते हैं। अमर सिंह को ना सिर्फ राजनैतिक गलियारों बल्कि बॉलिवुड सहित कॉर्पोरेट सेक्टर से बेहतर कनेक्शन के लिए जाना जाता है।
पिछले कुछ समय से जिस तरह से अमर सिंह ने आजम खान सहित तमाम सपा नेताओं की आलोचना और प्रहार को झेला उससे उन्होंने यह भी साफ किया कि वह समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
राज्यसभा में बयानों की तीखी धार और कुर्मी वोटो ंका समीकरण बेनी प्रसाद वर्मा राजनीति का सफर मुलायम सिंह यादव ने रेवती रमण सिंह और बेनी प्रसाद वर्मा के साथ मिलकर शुरु किया था। बेनी प्रसाद वर्मा को कुर्मी वोटों के बड़े दावेदार के तौर पर जाना जाता है। बेनी प्रसाद वर्मा अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए भी अक्सर चर्चा में रहते हैं।
ऐसे में राज्यसभा में सपा को एक मुखर चेहरे की तलाश थी जो बेनी प्रसाद वर्मा बन सकते हैं। यही नहीं सपा बेनी प्रसाद वर्माको राज्यसभा भेजकर उस दाग से भी छुटकारा चाहती है कि पार्टी सिर्फ यादवों की पार्टी है।
2017 के चुनावों के खर्च के लिए उद्योगपति आये पार्टी में
राज्यसभा के लिए नामांकित होने वाले सदस्यों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम संजय सेठ का है। संजय सेठ रियल स्टेट व्यापारी है और शालीमार अपार्टमेंट्स जैसे बहुप्रतिष्ठित नाम के लिए उन्हें जाना जाता है। पार्टी संजय सेठ के जरिए अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की सोच रही है। आने वाले विधानसभा चुनाव में एक तरफ संजय सेठ जहां पार्टी की आर्थिक मदद कर सकते हैं तो दूसरी तरफ उन्हें राज्सभा की सदस्यता का तोहफा पार्टी ने दिया है। ऐसे में इस गठबंधन को आपसी जरूरतों का गठबंधन कहा जा सकता है।
करीबियों को भी लाये साथ, अगड़े वोटों की राजनीती का समीकरण
पूर्वांचल के बड़े नेताओं पर नजर डालें तो रेवती रमण सिं एक बड़ा चेहरा है। काफी लंबे समय से वह विधायक रहे हैं और वह दो बार सांसद रह चुके हैं। रेवती रमण सिंह के इस बार लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह पूरी तरह से दरकिनार हो गये थे।
आगामी विधानसभा चुनावों में अगड़ों के वोटों के लिए सपा ने अरविंद सिंह को राज्यसभा को टिकट दिया है। ऐसे में ठाकुरों औऱ अगड़ों के वोटों को साधने के लिए पार्टी ने अऱविंद सिंह को टिकट दिया है। गाजीपुर के अरविंद सिंह पहले भी राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं।
सुखराम सिंह यादव और विशंभर सिंह मुलायम सिंह के पुराने मित्रों में जाने जाते हैं। सुखराम सिंह चौधरी हरमोहन सिंह के बेटे हैं और वह पुराने सपा नेता हैं। जबकि विशंभर निषाद के जरिए मुलायम सिंह निषाद समुदाय को अपनी ओर करना चाहते हैं। ऐसे में एक तरफ जहां मुलायम सिंह ने अपने पुराने दोस्तों को तवज्जों देने की कोशिश की है तो इसके जरिए वोटों को भी साधने की कोशिश की है।












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