महज पांच वोटों से यूपी के सीएम बनते-बनते रह गए थे अजित सिंह, जानिए ये दिलचस्प किस्सा
महज पांच वोटों से यूपी के सीएम बनते-बनते रह गए थे अजित सिंह, जानिए ये दिलचस्प किस्सा
लखनऊ, मई 06: कोरोना संक्रमण से जूझ रहे राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के प्रमुख व लोकप्रिय किसान नेता चौधरी अजित सिंह का गुरुवार को निधन हो गया। 82 वर्षीय आरएलडी प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। अजीत सिंह को किसानों और जाटों का बड़ा नेता माना जाता था। अजीत सिंह को पश्चिमी यूपी के किसान 'छोटे चौधरी' या 'छोटे सरकार' के नाम से भी बुलाते थे। सियासी गलियारों में अजीत सिंह के लिए एक जुमला काफी मशहूर था और वो था कि 'सत्ता किसी की भी हो लेकिन मंत्री तो अजीत सिंह ही बनेंगे'। लेकिन क्या आप जानते है कि चौधरी अजित सिंह का यूपी का मुख्यमंत्री बनने का सपना साकार नहीं हो सका था।

साल 1989 में सीएम बनते-बनते रह गए थे अजित सिंह
ये बात साल 1989 की है। 1989 में चुनाव में जनता दल की जीत के बाद अजीत सिंह का नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित हुआ था। लेकिन मुलायम सिंह यादव ने ऐसा दांव चला कि अजित सिंह सीएम बनने का सपना संजोते रह गए और मुलायम सिंह यादव सीएम बन गए। आजतक की खबर के मुताबिक, साल 1980 में जनता पार्टी, जन मोर्चा, लोकदल (अ) और लोकदल (ब) ने मिलकर जनता दल का गठन किया था। चार दलों की एकजुट ताकत ने असर दिखाया और उत्तर प्रदेश के 1980 के विधानसभा चुनाव में 208 सीटों पर जीत मिली थी। यूपी में उस समय कुल 425 विधानसभा सीटें थी, जिसके चलते जनता दल को बहुमत के लिए 14 अन्य विधायकों की जरूरत थी।

अजित सिंह और मुलायम सिंह सीएम पद के थे उम्मीदवार
दरअसल, जनता दल की ओर से यूपी मुख्यमंत्री के दो उम्मीदवार थे, मुलायम सिंह और चौधरी अजित सिंह। पार्टी हाईकमान ने यूपी के मुख्यमंत्री पद के लिए चौधरी अजित सिंह का नाम फाइनल कर दिया और मुलायम सिंह का उप मुख्यमंत्री के लिए। शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रही थी, इस बीच मुलायम सिंह यादव ने ऐसा दांव चल कि जनमोर्चा के विधायक अजित सिंह के खिलाफ खड़े हो गए। इतना ही नहीं, वो मुलायम सिंह यादव को सीएम बनाने की मांग कर बैठे।

डीपी यादव और बेनी प्रसाद वर्मा ने की थी मुलायम सिंह यादव की मदद
उस वक्त केंद्र में जनता दल की सरकार थी और विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के पीएम थे। उत्तर प्रदेश में जनता दल की जीत के साथ ही उन्होंने चौधरी अजित सिंह के नाम की घोषणा सीएम पद के कर दी थी। तो वहीं, मुलायम सिंह यादव को उप मुख्यमंत्री का पद सौंपा गया था। लेकिन मुलायम सिंह यादव ने डिप्टी सीएम का पद ठुकरा दिया और सीएम पद की दावेदारी कर दी। तब सीएम पद के लिए यह फैसला लिया गया कि लोकतांत्रिक तरीके से विधायक दल की बैठक में गुप्त मतदान के जरिए होगा। जिसके बाद मुलायम सिंह यादव तगड़ा दांव खेलते हुए बाहुबली डीपी यादव की मदद से अजीत सिंह के खेमे के 11 विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया। इस काम में उनकी मदद बेनी प्रसाद वर्मा ने भी की।

महच पांच वोटों से हार गए थे अजित सिंह
जनता दल विधायक दल की बैठक में हुए मतदान में अजित सिंह महज पांच वोट से हार गए और मुलायम सिंह अचानक मुख्यमंत्री बन गए। पांच दिसंबर 1989 मुलायम ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।












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