अमर से भी ज्यादा है मुलायम का गायत्री प्रेम, पढ़ें प्रोफाइल
लखनऊ। थोड़े ही समय में 'प्यादे' से 'बादशाह' के खासमखास बन गए गायत्री प्रसाद प्रजापति को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने आठवें कैबिनेट में फिर शामिल कर लिया। इस कैबिनेट विस्तार के साथ ही समाजवादी खेमे में गायत्री प्रजापति का रुतबा और भी बढ़ गया। गायत्री प्रजापति यूपी के पहले ऐसे मंत्री बन गए जिन्होंने तीन साल में चार बार मंत्री पद का शपथ लिया हो।

आपको बता दें कि खनन मंत्री रहे गायत्री प्रजापति को अखिलेश यादव ने लगभग दो सप्ताह पहले एक अन्य मंत्री राजकिशोर सिंह के साथ भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया था। इस फैसले से अखिलेश की उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के साथ 'जंग' शुरू हो गई, जिसमें आखिरकार अखिलेश को ही झुकना पड़ा, क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने इस जंग में अपने छोटे भाई शिवपाल का साथ दिया, जिससे अखिलेश को अपने फैसले पलटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों मुलायम के लिए अखिलेश से भी ज्यादा जरूरी हैं गायत्री प्रजापति? अखिर गायत्री प्रजापति ने ऐसा किया क्या कि वो मुलायम सिंह यादव के इतने करीबी बन गए। तो आईए आज उन पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं कि आखिर क्या मजबूरी है जो मुलायम को गायत्री प्रसाद जरूरी हैं।
राजनीतिक नहीं बल्कि कुछ और ही है कारण
गायत्री प्रजापति के कई कमाई वाले धंधों में अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की हिस्सेदारी है। के साथ कथित रियल स्टेट के बिजनेस से बढ़ती नजदीकियां थी।
मुलायम सिंह की राजनीति को करीब से जानने वालों का मानना है कि गायत्री प्रजापति के जरिये हो रही खनन की काली कमाई की हिस्सेदारी मुलायम के करीबी होने का सबसे बड़ा कारण है। गायत्री प्रजापति के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब वे नेताजी के घर जाते हैं तो उस दिन वहां के स्टाफ की भी जेबें गर्म हो जाती हैं। मुलायम के बेहद करीबी बनने में गायत्री की यही गर्मी काम कर गई।
मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता को गायत्री ने बना लिया संरक्षक
बताया जाता है कि गायत्री प्रजापति ने मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता को अपना संरक्षक बना लिया। वहीं सत्ता से दूर साधना को भी बेटे प्रतीक यादव के भविष्य सुरक्षित करने के लिए किसी ऐसे ही आदमी की जरूरत थी जो उन्हे गायत्री के रूप में मिल गया। गायत्री प्रजापति को मनमानी करने के लिए साधना गुप्ता के दबाव में अखिलेश सरकार से पूरी छूट मिली हुई थी।
तो साधना गुप्ता को कीमत के रूप में काली कमाई में अपना हिस्सा मिल रहा था। कहा तो यहां तक जाता है कि गायत्री प्रजापति साधना गुप्ता के अलावा समाजवादी परिवार के अन्य लोगों का भी पूरा ध्यान रखते थे। उन्होंने कभी किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया।
बीपीएल कार्ड से करोड़पति बने गायत्री
गायत्री प्रजापति को 2013 में कोयला मंत्री बनाया गया था, जिसके बाद उनकी संपत्ति में लगातार बढ़ोत्तरी होती रही। आज उनके पास बीएमडब्ल्यू, जैसी तमाम महंगी गाड़ियों समेत काफी संपत्ति है। 2002 में अमेठी के परसावा गांव से उन्हें बीपीएल कार्ड जारी किया गया था। लेकिन 2012 में उन्हें एपीएल कार्ड जारी किया गया।
करोड़ों की संपत्ति है गायत्री के पास
2012 में गायत्री प्रजापति के पास 1.81 करोड़ रुपए थे। लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने जो शिकायत लोकायुक्त को दी है उसमें उन्होंने कहा है कि गायत्री प्रजापति के पास 942.5 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
चार साल में चौथी बार मंत्री की शपथ
खान मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को अखिलेश यादव ने दो हफ्ते पहले भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया था। लेकिन अब यही प्रजापति फिर से अखिलेश सरकार की शोभा बढ़ाने जा रहे हैं। गायत्री पहले ऐसे मंत्री हैं जो अखिलेश सरकार में चौथी लिए।

खनन घोटाले का आरोप
2012 के चुनावी हलफनामे में 1 करोड़ 70 लाख की संपत्ति बताने वाले गायत्री पर आरोप है कि इन्होंने चंद सालों में करीब 1 हजार करोड़ की अवैध संपत्ति जमा कर ली है। आरोप लगता है कि राज्य भर में अवैध खनन का कारोबार इन्हीं की देखरेख में फल फूल रहा है।
2012 के बाद तेजी से उभरे गायत्री प्रजापति
2012 में अमिता सिंह को हराने के बाद गायत्री प्रजापति ने राजनीति की सीढ़िया काफी तेजी से चढ़ी, पहले वह पार्टी के मुखिया के करीब आए, उसके बाद उन्हें 17 पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व करने का जिम्मा दिया गया। यही नहीं 2014 में वह लोकसभा चुनाव के लिए स्टार प्रचार भी रहे। महज एक साल के भीतर उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया।












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