उप्र विधानसभा में हंगामा, समय से पहले सत्र विराम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र मंगलवार को फिर से शुरू हुआ, लेकिन हंगामे के कारण समय से पहले ही समाप्त हो गया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। पूर्वाह्न् 11 बजे जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने सदन में मध्याह्न् भोजन और अध्यापकों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार की खिंचाई की।

भाजपा के श्यामदेव राय चौधरी और डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने 29 अगस्त को गाजीपुर में मध्याह्न् भोजन लेने के बाद बच्चों के बीमार होने का मामला उठाया। जवाब में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश कुमार सिंह ने कहा कि गाजीपुर में मध्याह्न् भोजन से 50 बच्चे बीमार हो गए थे। उनकी मेडिकल रिपोर्ट लखनऊ भेजी गई है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि दोषी अध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को स्वस्थ्य भोजन देने के लिए कृतसंकल्प है। डॉ. वाजपेयी मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे और दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की बार-बार मांग करते रहे। भाजपा के ही सुरेश कुमार खन्ना ने जानना चाहा कि सूबे के बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक कुल कितने अध्यापकों की आवश्यकता है तथा कितने अध्यापक व शिक्षामित्र कार्यरत हैं? इसके जवाब में मंत्री योगेश ने बताया कि अध्यापकों के रिक्त पदों की जानकारी एकत्र की जा रही है।
इस बीच बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने गन्ना किसानों की समस्या और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार की जमकर खिंचाई की। दोपहर बाद भाजपा और बसपा सदस्यों के हंगामा के चलते अध्यक्ष ने विधानसभा सत्र को समय से पहले समाप्त कर दिया। इससे पहले विपक्षियों की मांग पर शीतकालीन सत्र को 25 से लेकर 27 नवंबर तक चलाने का फैसला लिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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