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119 करोड़ की हेल्थ योजना तैयार, मोदी के सिग्नल का इंतजार

health programme
लखनऊ।(संजीव कुमार सब्बरवाल)बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की हत्या और कारावास के कारण विभागीय छवि को लगे ग्रहण से उबरने के लिए उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने 119 करोड़ रूपये की महत्वाकांक्षी पीआईपी. (प्रोग्राम इम्प्लीमेन्टेशन प्रोग्राम) को अंतिम रूप दे दिया है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार स्वास्थ्य इकाई को समुदाय से सीधे जोड़ने का प्रयास ब्रांण्डिंग के जरिए होगा। सहभागी संचार (इण्टर पर्सनल कम्युनिकेशन आई.पी.सी.) सूचना शिक्षा संचार (इन्फारमेशन एजूकेशन कम्युनिकेशन, आई.ई.सी.) और व्यवहार परिवर्तन संचार (बिहेवियर चेन्ज कम्युनिकेशन बी.सी.सी.) के मॉडलों का प्रयोग करके स्वास्थ्य योजनाओं के वांछित परिणाम हासिल करने के लिए विस्तृत खाका खींचा गया है जो केन्द्र सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश व जि़ला स्तर पर लागू होगा।

पी.आई.पी. को केन्द्र से हरी झण्डी मिलने के आसार को बल मिलता दिखता है। स्वास्थ्य महकमे में चर्चा है कि उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव जीतने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महत्वाकांक्षी योजना की ओर खास ध्यान देंगे। नेशनल हेल्थ मिशन (एन.एच. एम.) की राज्य जि़ला स्तरीय आई.ई.सी./बी.सी.सी. पी.आई. पी. (2014-17) का प्रारूप एन.एच.एम. ने यूनीसेफ के सहयोग से तैयार किया है। इसको तैयार करने के लिए यूनिसेफ ने छह माह का गहन शोध प्रदेश के 18 डिविजनों के अन्तर्गत 75 जि़लों में किया। बी.सी.सी. ब्राण्डिंग ऑफ फेसिलिटी। इससे तात्पर्य है चिकित्सायों में समुदाय को मिलने वाली सुविधाओं की इस हद तक ब्राण्डिंग ताकि समुदाय खुद को सुविधाओं से सीधा जुड़़ा हुआ महसूस कर सके।

इसमें अस्पतालों के विभिन्न विभागों में लगने वाले पोस्टरों, होर्डिंग, सूचना पट्ट, साइनेज आदि पर लिखे संदेश और उनके रंग संयोजन की ब्राण्डिंग का कार्य होना है। डाॅ. सरकार बताती हैं कि जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर लगे पोस्टरों, सूचना पट्ट आदि का जो रंग संयोजन होगा वह हड्डी रोग या हृदय रोग विभाग से भिन्न होगा और यह जिला चिकित्सालय से लेकर स्वास्थ्य उपकेन्द्र तक समान होगा तथा पूरे प्रदेश में लागू होगा। ताकि निरक्षर भी रंग की पहचान से अस्पताल में सही स्थान पर पहंुच सके। प्रदेश भर के जिला, महिला, सामुदायिक, प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्रों में लगने वाले होर्डिंग, वॉल पेंन्टिंग आदि पर अंकित संकेत व रंग संयोजन को समान रखा जायेगा ताकि जो व्यक्ति अस्पताल पहुंचे तो वह रंग देखकर ही समझ जाये कि वह हड्डी विभाग के पास है या फिर नेत्र विभाग में। पायलट स्टडी के तौर पर यह प्रयोग सर्वप्रथम लखनऊ में होगा।

इस योजना में जि़ला और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों को वैयक्तिक व व्यवहार परिवर्तन संचार के क्षेत्र में प्रशिक्षित करके तैनात किए जाने, प्रदेश स्तरीय व्यवहार परिवर्तन प्रकोष्ठ की स्थापना किये जाने, आने वाले समय में ‘आशा रेडियो' कार्यक्रम' के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं और किस परिस्थिति में क्या व्यवहार करें की जानकारी देने का लक्ष्य रखा गया है। किशोर-किशोरियों की समस्याओं के समाधान के लिए रेडियो कार्यक्रम ‘कुछ तुम कहो-कुछ हम कहें' चलाये जाने का भी जिक्र किया गया है।

डॉ. रचना सरकार कहती हैं कि गांवों में तैनात आशा बहू को इण्टर पर्सनल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में और सुदृढ़ करने के लिए अब उन्हें ‘मोबाईल कुंजी' और ‘फ्लिप बुक' से लैस किये जाने की योजना बनाई गयी है। ‘मोबाईल कुंजी' एक ऐसा खास मोबाईल होगा जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और उनके समाधान, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के पालन-पोषण संबंधी उचित जानकारी अपलोडेड रहेगी। आशा बहू अपनी व जरूरतमंद व्यक्ति की आवश्यकता के अनुरूप जानकारी उन्हें तुरन्त मोबाइल पर वीडियो दिखाकर उपलब्ध करा सकेगी।

‘फ्लिप बुक' एक चित्रों में भरी बड़ी पुस्तिका होगी। इसमें चित्रों के माध्यम से वांछित जानकारी दी जायेगी। इस पुस्तिका को टार्गेट - आॅडियन्स की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जायेगा। लड़कों की तुलना में कम होती लड़कियों की जटिल समस्या से निपटने के लिए लोक गीतों की मदद ली जायेगी। इसके लिए एक टोली बनायी गयी है जो उन जिलों, जहां लड़कियों की संख्या लगातार कम हो रही है, में जाकर ‘लोकगीतों में बेटी' कार्यक्रम के तहत लोगों को जागरूक करेगी।

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