दरक रही है यूपी के 'मायावी किले' के नीचे की ज़मीन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक राज करने वाली बहुजन समाज पार्टी के मानो बुरे दिन शुरू हो गये हैं। जैसे-जैसे सपा शासन मजबूती की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मायावती का कुनबा धीरे-धीरे बिखरने लगा है। जी हां बहुजन समाज पार्टी में अंदरूनी कली बढ़ गई है और अब तो यह कलह सड़क पर आ गई है। खास बात यह है कि पार्टी में जब-जब फूट पड़ी, तब-तब मायावती पर पैसे लेकर टिकट देने के आरोप लगे।

Mayawati's in extreme tension as BSP getting shattered

लगातार तीन बड़े झटके

पाटी को पिछले एक-डेढ़ सालों में तीन बड़े झटके लगे हैं। पार्टी प्रमुख को पहले अखिलेश दास (पूर्व सांसद ) को निष्कासित करना पड़ा, अब राज्यसभा सांसद जुगल किशोर को हाशिए पर डालना पड़ा है। संयोग ऐसा कि 'बहनजी' पर हमेशा पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगता रहा। उप्र में विधानसभा चुनाव 2017 में होने हैं। ऐसे में बसपा के महारथियों का एक-एक कर अलग होना मायावती के लिए बड़ा नुकसानदायक साबित हो सकता है।

पिछले चुनाव में मायावती के खास रहे बाबू सिंह कुशवाहा का हश्र पहले ही दिखाई दे चुका है। इसके बाद बसपा से राज्यसभा सांसद रहे अखिलेश दास, दारा सिंह चौहान और अब बसपा के पुराने नेता जुगल किशोर के बसपा से निकाले जाने के बाद पार्टी पूरी तरह से बैकफुट पर आ चुकी है।

पार्टी के पूर्व नेता के दावे

  • पार्टी के पूर्व नेता जुगल किशोर ने दावा किया है कि बसपा मुखिया के रवैये से पार्टी के सभी विधायक दुखी हैं।
  • बसपा मुखिया के रवैये से सभी विधायक दुखी हैं। करीब 70 विधायक ऐसे हैं जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं।
  • चुनाव में अभी दो वर्ष से भी ज्यादा वक्त होने की वजह से सभी नाराज़ विधायक चुप हैं।
  • अभी विधानसभा चुनाव हो जाए तो 70 विधायक तुरंत इस्तीफा दे देंगे।
  • मायावती चुनावों के दौरान एक टिकट एक करोड़ रुपये मांगती हैं। जो दे देता है, उसे टिकट, जो नहीं उसे ठेंगा।

और भी हैं राजनीतिक तीर

जुगल किशोर के इस रुख के बाद पार्टी ने तत्काल उन्हें सभी पदों से हटाते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उनके निष्कासन को लेकर बसपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब अगली बार बसपा की सरकार बनेगी तो जुगल किशोर की अकूत संपत्ति की जांच करवाई जाएगी। यानी फिर राजनीतिक दुश्मनी निकालने की तैयारी शुरू हो चुकी है। मजेदार बात यह है कि जब मीडिया ने उनसे पूछा कि वो सपा सरकार से जांच करवाने की मांग क्यों नहीं करते, तब स्वामी प्रसाद मौर्य चुप्पी साध गये।

क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ

  • बसपा के इन महारथियों का साथ छूटने से मायावती बैकफुट पर आ गई हैं।
  • इन आरोप से धूमिल हो रही छवि के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • चुनाव से पहले ही बड़े-बड़े नाम एक-एक कर पार्टी से अलग हो रहे हैं।
  • दिग्गज नेताओं का अलग होना पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
  • बाहर जाने का सिलसिला नहीं थमा तो वाकई इसका खामियाजा 2017 में भुगतना पड़ेगा।
  • उत्तर प्रदेश में बसपा के कुल 80 विधायक हैं। और लोकसभा चुनाव में खाता तक नहीं खुला।

आरोप प्रत्यारोप

  • अखिलेश दास ने मायावती पर: मायावती पैसे लेकर टिकट देती हैं और ऐसा करके वो सिर्फ अपनी जेबें भर रही हैं।
  • मायावती ने अखिलेश दास पर: अखिलेश ने मुझे टिकट देने के लिये 100 करोड़ रुपये की पेशकश की थी।
  • दारा सिंह चौहान ने मायावती पर: मायावती सिर्फ पैसे की भाषा समझती हैं।
  • मायावती ने चौहान पर: चौहान एक अनुशासनहीन नेता हैं, उनके लिये पार्टी में कोई जगह नहीं।

खैर अब यूपी में सत्ता में बसपा की वापसी हो या न हो, मगर 'बहन जी' जीते जी अपनी आदमकद प्रतिमाएं बनवाकर खुद को 'अमर' करने की जुगाड़ पहले ही कर चुकी हैं।

इनपुट- आईएएनएस।

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