यूपी में छेड़छाड़ व उत्पीड़न के मामलों में लखनऊ नंबर 1

लखनऊ। इतिहास के पन्नों में अपनी तहजीब व अदब के लिए मशहूर राजधानी लखनऊ जहां एक ओर अपनी संस्कृति व सभ्यता में अग्रणी है वहीं दूसरी ओर छेड़छाड़ व उत्पीड़न के मामले में प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षाकृत पहले पावदान पर काबिज है। प्रदेश के 72 जिलों की तुलना में फोन द्वारा यहां सबसे ज्यादा छेड़छाड़ व उत्पीड़न की घटनाएं होती हैं। यह चौंका देने वाली बात सामने आयी है वूमेन पावर हेल्पलाइन के आकड़ों से।

ग्रोइंग ऐज की लड़कियां जिनकी उम्र अभी महज 15 साल तक है वह भी इससे अछूती नहीं रही हैं। राजधानी के शोहदे बेपरवाह होकर इन्हें भी अपना निशाना बना रहे हैं। और फोन द्वारा इनसे भी अश्लील बाते करने में गुरेज नही करतें। वूमेन पावर लाइन के इंचार्ज कुंवर राघुवेन्द्र प्रताप सिंह की माने तो मात्र एक वर्ष के अन्दर 1,47,890 श‍िकायतें फोन द्वारा दर्ज करायी गयी हैं, जिसमें 70,234 श‍िकायतें छात्राओं की थीं।

शोहदों की पहली पसन्द 20 से 25 वर्ष की लड़कियां

वूमेन पावर लाइन से मिले आकड़ों की मानें तो प्रदेश के शोहदों की पहली पसन्द 20 से 25 वर्ष की लड़कियां ही हैं। आकड़ों में शोहदों की इस पसन्द का खुलासा हुआ है। एक वर्ष में इस ऐज की सबसे ज्यादा 51,867 लडकियों को शोहदों ने टारगेट किया है।

क्या है वूमेन पावर लाइन?

वूमेन पावर लाइन समाज में महिलाओं की सिथति को सुदृढ़ बनाने छेड़छाड़ व उत्पीड़न की घटनाओं को अन्जाम देने वाले शोहदों पर नकेल कसने की एक व्यवस्था है, जो कि 15 नवम्बर 2012 को नवनीत सिकेरा (डिआर्इजी) के नेतृत्व में शुरू की गर्इ। इसके तहत कोई भी लड़की जो छेड़छाड़ या पीछा करने वालों से परेशान है, हेल्पलाइन नंबर 1090 पर कॉल करके सूचना दे सकती है।

वूमेन पावर लाइन के पंचतत्व व कार्यप्रणाली तस्वीरों के साथ-

विमेन पावर हेल्पलाइन

विमेन पावर हेल्पलाइन

इसमें श‍िकायत करने वाली लड़की की पहचान गुप्त रखी जात है।

पुलिस की एक टीम है

पुलिस की एक टीम है

इंचार्ज राघुवेन्द्र प्रताप ने बताया कि इसमें पीड़ि‍तों द्वारा कॉल आने के तुरन्त बाद हमारी टीम सक्रिय हो जाती है।

पहचान रखी जाती है गुप्त

पहचान रखी जाती है गुप्त

यदि विभिन्न परिस्थ‍ितियों में रिपोर्ट दर्ज करने की स्थ‍िति भी आ जाये तो पुलिस को ही पार्टी बनाकर पीड़ि‍ता को पुर्णत: गुप्त रखा जाता है।

1090 पर कॉल करें

1090 पर कॉल करें

श‍िकायतकर्ता को कभी थाने नहीं बुलाया जाता है। और पूरे राज्य में इसका एक ही नम्बर 1090 है, जिसके तहत पीड़‍िता अपनी कम्पलेन दर्ज करा सकती है।

कईयों को हुई जेल

कईयों को हुई जेल

पीड़ि‍ता का फोन महिला अधिकारियों द्वारा ही उठाया जाता है। उन्होने बताया कि अभी तक इसके तहत 114 लोगों को जेल भेजा जा चुका है।

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