अयोध्या कांड के ढाई दशक और यूपी चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति

लखनऊ। 1990 में जब अयोध्या आंदोलन शुरु हुआ तो उस वक्त कारसेवकों को रोकने के लिए प्रयास शुरु किये गये और मुलायम सिंह यादव की प्रदेश में सरकार के दौरान पुलिस की कार्यवाही में 16 कारसेवकों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी।

mulayam singh yadav

ढाई दशक बाद आयी अयोध्या गोलीकांड की याद

अयोध्या की इस घटना को 25 साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन चुनाव के चंद महीनों पहले कारसेवकों पर गोली चलाये जाने के फैसले को सही ठहराने के मुलायम सिंह के बयान ने यूपी की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है।

मुलायम सिंह ने हाल ही में कहा कि मुसलमानों का देश में भरोसा बनाये रखने के लिए गोली चलवायी थी। उन्होंने कहा कि उस वक्त 16 लोगों की जान चली गयी थी लेकिन अगर 30 लोगों की भी जान जाती तो भी मैं गोली चलवाता। उन्होंने कहा कि मेरे इस फैसले की सदन में काफी आलोचना हुई लेकिन मैंने देश की एकता को बनाये रखने के लिए यह फैसला लिया था।

लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर अयोध्या मुद्दे के ढाई दशक बीत जाने के बाद भी आखिर मुलायम सिंह यादव को अपने इस फैसले को सही ठहराने की क्या जरूरत थी।

यूपी चुनाव, ध्रुवीककरण की राजनीति का गढ़

यूपी में धर्म और जाति की राजनीति का वर्चस्व दशकों से रहा है। हिंदू-मुस्लिम के नाम पर भाजपा, सपा कांग्रेस और तमाम राजनैतिक पार्टियां वोटों का ध्रुवीकरण करती आयी हैं। भाजपा पर लंबे समय से मुस्लिमों के नाम पर चुनाव का ध्रुवीकरण करने का आरोप लगता आया है। ऐसे में मुस्लिम वोटों को अपनी ओर साधने के लिए सपा हमेशा से ही कोशिश करती आयी है। अयोध्या कांड के बाद ही सपा यूपी में बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।

मंदिर का राजनीति और वोटों का समीकरण

यूपी चुनाव में एक बार फिर से ध्रुवीकरण की हवा फिर से चलने लगी है। सपा इस बात से वाकिफ है कि भाजपा राम मंदिर के मुद्दे को शुरुआत से ही यूपी चुनाव का अहम मुद्दा बनाती आयी है। यहां तक की हाल ही में तमाम भाजपा, आरएसएएस, हिंदू संगठन व तमाम संगठनों के लोगों ने राम मंदिर के निर्माण की बात कही है। मंदिर के नाम पर मुखर होती आवाज को अपनी ओर करने का सपा कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती है। लिहाजा मुलायम सिंह का बयान यूपी में हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की ओर एक मजबूत कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

ओवैसी फैक्टर और मुस्लिम वोटों का बिखराव

चुनाव के चंद महीनों पहले मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिहाज से देखा जाए तो मुलायम सिंह का बयान काफी अहम हो जाता है। मुलायम सिंह के इस बयान के पीछे यूपी में भाजपा की बढ़ती पैठ व ओवैसी की पार्टी का यूपी में चुनाव लड़ने का ऐलान अहम वजह हो सकता है।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम ने यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। ऐसे में मुस्लिम वोटों को बिखराव को रोकना सपा के लिए बड़ी चुनौती है। इस लिहाज से मुलायम सिंह यादव के बयान को मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने के लिए अयोध्या मामले पर दिया बयान काफी अहम हो जाता है।

बहरहाल देखने वाली बात यह है कि एक बार फिर से यूपी धर्म के नाम पर वोट करता है या फिर दशकों से चली आ रही धर्म की राजनीति से उपर उठक प्रदेश के विकास के मुद्दे पर वोट करती है।

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