दादरी विवाद गोहत्या या सांप्रदायिक मामला नहीं था- यूपी पुलिस
लखनऊ। बिहार चुनाव से ठीक पहले जिस तरह से उत्तर प्रदेश के दादरी में अखलाक की हत्या ने देशभर में सांप्रदायिकता को लेकर एक बहस छेड़ी थी। उस विवाद में अब नया मोड़ आ गया है।

दादरी मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने जो चार्जशीट दायर की है उसमें कहीं सांप्रदायिकता और गोहत्या का जिक्र नहीं किया गया है। इस चार्जशीट में भाजपा के नेताओं सहित 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
साथ ही इस मामले में गोहत्या की बात का जिक्र नहीं किया गया है ना ही इस मामले को सांप्रदायिक घटना बताया गया है। हालांकि इस विवाद की शुरुआत गोहत्या की वजह से हुई यह कहा गया है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
आपको बता दें कि 28 सितंबर को दादरी के गांव में अखलाक के घर पर गोमांस की खबर के चलते कुछ लोगों ने उसके घर पर धावा बोलकर उसे मौत के घाट उतार दिया था।
अखलाक के बेटे को भी लोगों ने बुरी तरह से पीटा था। इस घटना के बाद जमकर सियासी बहस हुई थी और अखिलेश सरकार ने अखलाक के परिवार को 45 लाख रुपए से अधिक की मदद के साथ एक सदस्य को नौकरी और घर की सुविधा मुहैया करायी थी।
पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें भाजपा के नेता विशाल राणा और उनके चचेरे भाई शिवम का नाम मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल है। इन लोगों पर आरोप है कि भीड़ का नेतृत्व करते हुए इन लोगों ने अखलाक के घर पर धावा बोला था।
गौतमबुद्धनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक किरण एस ने बताया कि हरिओम, विशाल, सचिन, उपेन्द्र, हरिओम, गौरव, पुनीत, सौरभ, श्रीओम सहित 14 बालिग व एक नाबालिग के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।












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