बयानों के सूरमा दीपक सिंघल अब सरकार का भ्रष्टाचार पकड़ेंगे
लखनऊ। यूपी की सियासत में उठापटक का दौर दीपक सिंघल को मुख्य सचिव के पद से हटाए जाने से शुरु हुआ था। खुद अखिलेश यादव ने मीडिया के सामने आकर कहा था कि मुख्य सचिव और मंत्रियों को उन्होंने हटाया। भ्रष्टाचार और तमाम विवादों से गहरा नाता रखने वाले दीपक सिंघल को पार्टी ने आगामी चुनाव के मद्देनजर महज ढाई महीने के कार्यकाल के बाद उनके पद से हटा दिया था। लेकिन एक बार फिर से उन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई है।
विवादों से लंबा नाता रहा है दीपक सिंघल का

महज कुछ दिनों के भीतर ही सिंघल को राज्य सतर्कता आयोगा का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन भ्रष्टाचार के आरोपों व अपने बड़बोले स्वभाव की वजह से दीपक सिंघल को उनके पद से हटाया गया था उन्हें सरकार के भीतर के भ्रष्टाचार को पकड़ने की जिम्मेदारी दी गई है।
अखिलेश सरकार ने आज तीन अहम आईएस के तबादले किए जिनमें दीपक सिंघल एक हैं जिन्हें राज्य सतर्कता आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। जबकि भुवनेश्वर कुमार को लखनऊ का कमिश्नर तो अनूप चंद्र पांडेय को प्रमुख सचिव वित्त बनाया गया है।
कब-कब बिगड़े सिंघल के बोल
सबसे पहले सिंघल उस वक्त चर्चा में आए जब उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कहा कि मुख्यमंत्री जाते-जाते तोहफा देना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने खुद को संभालने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान दीपक सिंघल जब मंच पर बोल रहे थे तो उन्होंने मुख्यमंत्री के सलाहकार आलोक रंजन को अपनी टोकते हुए यह तक कह दिया था कि सलाहकार महोदय आप सलाह बाद में दे दीजिएगा।
उनकी इस टिप्पणी से वहां बैठे मुख्यमंत्री भी असहज हो गए थे। इससे पहले भी उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जैसे वह अफसरों को भी जेल भेजवा देंगे, थानेदारों को फोन करके उनसे फीडबैक लेंगे। यही नहीं उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट योजना को मुख्यमंत्री से पहले खुद की योजना तक बता दिया था।












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