भाजपा के नये सेनापति केशव प्रसाद मौर्य की यूपी की चुनौतियां
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के रण को जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश के लिए नया सेनापति चुना है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के लिए आगामी विधानसभा बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। केशव प्रसाद के पास यूपी में भाजपा को एक नये कलेवर में पेश करने के साथ पार्टी को फिर से जीवित करने की बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन इस राह में उनके पास कई चुनौतियां भी हैं।
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उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए ऐसा राज्य हैं जहां नेता तो कई हैं लेकिन उनमें आपसी समन्वय और विचारों की सहमति नहीं। ऐसे में इन चुनौतियों से किस तरह से केशव प्रसाद निपटते हैं यह देखने वाली बात है। देश में जाति की राजनीति के लिए बिहार के बाद यूपी का नंबर आता है। बिहार में जिस तरह से महागठबंधन ने भाजपा को पटखनी दी है उसने जातिगत राजनीति की संगठित ताकत को दिखाया है।
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बिहार में जिस तरह से जातिगत राजनीति के गठबंधने के आगे भाजपा को मुंह की खानी पड़ी, ऐसे में यूपी में एक बार फिर से भाजपा को जातिगत राजनीति से पार पाना होगा। केशव प्रसाद के पास सबसे बड़ी चुनौती होगी यूपी में दलित, मुस्लिम, अग्रणी और पिछडी़ जातियों का रुख पार्टी की ओर एक बार फिर से मोड़ना।
यूपी ने भाजपा को कई सशक्त नेता दिये हैं, वरिष्ठ, युवा, नये और पुरानें सभी चेहरों को एक साथ एक सोच-विचार के टेंट के नीचे लाना भी केशव प्रसाद के लिए चुनौती है। वरुण गांधी, योगी आदित्यनाथ, दिनेश शर्मा, लक्ष्मीप्रसाद, लाल कृष्ण आडवाणी सहित कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जिन्हें साथ लेकर चलना भी केशव प्रसाद की प्राथमिकता होगी।












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