Lucknow चिड़ियाघर में कैंसर पीड़ित बाघ किशन की हुई मौत, किशनपुर से रेस्क्यू कर लाया गया था
लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल पार्क में 30 दिसंबर को कैंसर से पीड़ित नर बाघ किशन की मौत हो गई।

Lucknow News: राजधानी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल पार्क (Nawab Wajid Ali Shah Zoological Park) में शुक्रवार (30 दिसंबर) को कैंसर से पीड़ित नर बाघ किशन की मौत (tiger Kishan passed away) हो गई। बाघ को 01 मार्च 2009 को किशनपुर टाइगर रिजर्व, कामताड़ा दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से बचाया गया था और लखनऊ के प्राणी उद्यान में लाया गया था।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, किशन बाघ 2008 से स्थानीय मानव जीवन के लिए खतरा बन गया था। कई महीनों के अथक प्रयासों के बाद बाघ किशन को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया था। यहां लखनऊ लाए जाने के बाद उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और पता चला कि यह बाघ हेमांजिओसारकोमा नामक कैंसर से पीड़ित है। कैंसर बाघ के कान और मुंह के पास फैल गया था, जिससे वह जंगली जानवरों का शिकार करने में असमर्थ हो गया था।
इसलिए, यह मानव जीवन के लिए खतरा बन गया था। लखनऊ चिड़ियाघर में किशन 13 साल से ज्यादा समय तक रहे और उनका इलाज चल रहा था। वृद्ध होने और कैंसर से पीड़ित होने के बाद भी किशन एक सामान्य बाघ की तरह व्यवहार करता रहा। जूलॉजिकल पार्क के निदेशक वीके मिश्रा ने कहा कि अपने आखिरी दिनों में किशन ने सामान्य रूप से खाना बंद कर दिया था और उसने अपनी हरकत भी कम कर दी थी।
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उन्होंने कहा, ''बाघिन काजरी फिलहाल भोजन कर रही है, लेकिन उसकी उम्र अधिक होने के कारण उसके स्वास्थ्य की स्थिति भी चिंताजनक है। ठंड से बचाने के लिए हीटर आदि की भी व्यवस्था की गई है।












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