क्या 78 की शीला खत्म कर पायेंगी यूपी में 27 साल का सूखा
लखनऊ। यूपी में कांग्रेस ने शीला दीक्षित को सीएम उम्मीदवार घोषित करके ब्राह्मण वोटों को रिझाने की कोशिश तो की है लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि क्या सिर्फ ब्राह्मण वोटों को अपनी ओर करके कांग्रेस यूपी में 27 साल के सूखे को खत्म कर सकती है।
शीला के सीएम उम्मीदवार का पंचकोणीय विश्लेषण

सपा, बसपा और भाजपा के आगे बौनी कांग्रेस
यूपी में सपा और बसपा पहले से ही एक मजबूत विकल्प हैं, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी भी अपनी ताकत को एक बार फिर से यूपी में पुनर्जीवित करने में जुटी है। ऐसे में माहौल में कांग्रेस के पास इन कई चुनौतियों से पार पार पाना टेढ़ी खीर दिखती है।
दिल्ली के घोटाले नहीं छोड़ेंगे पीछा
जिस तरह से शीला दीक्षित को यूपी के मैदान में उतारा गया है उसका पार्टी को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। जिस तरह से दिल्ली में कई घोटालों मे शीला दीक्षित का नाम है उसका जवाब देना पार्टी को यूपी के चुनाव में मुश्किल में डाल सकता है। शीला दीक्षित पर सीडब्ल्यू जी, वाटर टैंकर घोटाला सहित पावर घोटाल ऐसे कई दाग हैं जिन्हें पार्टी के लिए यूपी में धोना आसान नहीं होगा। इन्ही घोटालों को आगे करके आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को पहले चुनाव में चार सीटों पर समेट कर रख दिया था।
ब्राह्मण वोटों में सेंध आसान नहीं
यूपी में ब्राह्मण राजनीति कई हद तक पूर्व की तुलना में काफी बदल चुकी है। जिस दौर में इंदिरा गांधी, कमलापति त्रिपाठी जैसे नेता यूपी में ब्राह्मण वोटों के अगुवा थे उस दौर की तुलना में मौजूदा ब्राह्मण राजनीति काफी हद तक बदल चुकी है। अभी भी कांग्रेस पूर्ण बहुमत से यूपी में सरकार बनाने की स्थिति में किसी भी हाल में नहीं दिख रही है। ऐसे में ब्राह्मणों का कांग्रेस की ओर रुझान हाल फिलहाल मुश्किल लगता है। भारतीय जनता पार्टी इस मामले में कांग्रेस को कड़ी चुनौती दे सकती है। पार्टी के पास पहले से ही मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, डॉ महेश शर्मा, दिनेश शर्मा जैसे चेहरे हैं।
कानून व्यवस्था पर जवाब देना होगा मुश्किल
यूपी में कानून व्यवस्था हमेशा से ही बड़ा विषय रहा है। लेकिन शीला दीक्षित का दिल्ली में रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है। कई विवादों से उनका नाता बतौर मुख्यमंत्री यहां रहा है। दिल्ली में निर्भया कांड व जेसिका लाल हत्याकांड में शीला दीक्षित पर नरम रुख दिखाने का आरोप पहले ही लग चुका है। ऐसे में यूपी में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के उनके दावों पर भी सवाल उठेगा।
विवादित बयान नहीं छोड़ेंगे पीछा
शीला दीक्षित ने कुछ समय पहले यूपी और बिहार को लेकर कई विवादित बयान भी दिये थे जिनसे पार पाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। शीला दीक्षित ने बयान दिया था कि बिहार और यूपी से लोग दिल्ली में अपराध करने आते हैं। ऐसे में विरोधी पार्टी उनके इस बयान को भुनाने से नहीं चूकेंगी।
78 की उम्र और 75 जिलों का दौरा
यूपी की राजनीति से शीला दीक्षित का हाल फिलहाल कोई खास नाता नहीं है। बजाए इसके कि उनका विवाद उमाशंकर दीक्षित के परिवार में हुआ था। यूपी की राजनीति को अलविदा कहे शीला दीक्षित को दशकों हो गये हैं। मौजूदा समय में शीला दीक्षित की उम्र 78 वर्ष है ऐसे में यूपी में चुनाव की तारीख में सिर्फ पांच या छह महीने का समय बचा है। उम्र के इस पड़ा में शीला किस तरह से यूपी के 75 जिलों का दौरा करेंगी यह भी बड़ा सवाल है।












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