सीएम योगी के 'तिलक-तराजू, परशुराम पर गंदी सियासत' बयान पर मायावती ने किया पलटवार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून सत्र के दौरान विधानमंडल में भी ब्राह्मणों और परशुराम का मुद्दा गूंजा। पिछले दो महीने से यह मुद्दा यूपी की राजनीति में विपक्षियों ने उठाया और काफी चर्चा में रहा। प्रदेश के ब्राह्मण वोट को रिझाने के लिए सपा और बसपा ने प्रदेश में परशुराम की मूर्ति बनाने की बात कही। इस पर शनिवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाषण देते हुए विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जातिवादी, विभाजनकारी और कुत्सित मानसिकता रखने वाले कुछ लोग पहले तिलक-तराजू की बात कर समाज में जहर घोलते हैं, फिर राम और परशुराम में भेद बताकर गंदी सियासत करते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सीएम योगी के इस बयान पर ट्वीट करते हुए कहा कि तिलक तराजू की बात उनकी पार्टी ने कभी नहीं कही। ये सब घृणित आरोप बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए विरोधी लगाते रहे हैं।
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मायावती ने ट्वीट कर भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सिर्फ रामराज्य की बात करने से यूपी की गरीब जनता का विकास नहीं होने वाला है, न ही उनको जुल्म-ज्यादती से निजात मिलने वाला है। कहा कि श्रीराम के उच्च आदर्शों पर चलकर सरकार चलाने से ही यह संभव हो सकता है जिस पर योगी आदित्यनाथ सरकार चलती हुई नजर नहीं आ रही है।

मायावती ने कहा कि भाजपा की जातिवादी कार्यशैली से दुखी होकर ब्राह्मण समाज के लोग बसपा से जुड़ रहे हैं तो ये कह रहे हैं कि तिलक तराजू की बात करने वाले अब परशुराम की बात कर रहे हैं। लेकिन ब्राह्मण समाज काफी बुद्धिमान है, इनके बहकावे में नहीं आएगा।

मायावती ने कहा कि तिलक तराजू की बात बसपा ने कभी नहीं कही और ना ही बाबरी मस्जिद के स्थान पर कभी शौचालय बनाने की भी बात कही है। ये सब घृणित आरोप विरोधियों ने केवल बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए इन्हें जबरन हमारी पार्टी से जोड़ दिया है, जो अतिनिंदनीय है। कहा कि यदि इस आरोप में अगर सत्यता होती तो बसपा अपनी पिछली सरकार में खासकर ब्राह्मण समाज के विधायकों को बड़ी संख्या में मंत्री व अन्य उच्च पदों पर क्यों रखती? ब्राह्मण समाज सबकुछ जानता है, वे गुमराह नहीं होंगे। पार्टी को ब्राह्मणों पर पूरा भरोसा है।












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