महाभारत 2017: मुलायम को धृतराष्ट्र तो माया को शूर्पनखा की संज्ञा दी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की महाभारत तो 2017 में होनी है, लेकिन पार्टियों के बीच एक दूसरे पर छींटाकशी अभी से शुरू हो गई है। ऐसे में दुर्योधन, धृतराष्ट्र और रावण जैसे महापात्र लोगों की बयानबाजी में दिखने लगे हैं। शुरुआत हुई है बाराबंकी के रामनगर से। यहां गांव फतेहपुरवा मलौली में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता रामबाबू द्विवेदी ने सुशासन पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन किया।
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जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में संतकबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी शामिल हुए। कार्यक्रम में भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुधीर कुमार सिंह समेत बाराबंकी के नव निर्वाचित जिलाध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव, पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष सिंह, पूर्व एमएलए रामनरेश रावत ने भी शिरकत की। सुशासन पखवाड़ा कार्यक्रम के जरिए मुख्य अतिथि सांसद शरद त्रिपाठी ने मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के समक्ष रखा। साथ ही उन्होंने अपने भाषण के दौरान यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में जनता से भारतीय जनता पार्टी का साथ देने की अपील की। कार्यक्रम के उपरांत सांसद शरद त्रिपाठी एवं रामबाबू द्विवेदी ने गरीब किसानों को 2000 कंबलों का वितरण भी किया।
मुलायम को कहा धृतराष्ट्र
किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता रामबाबू द्विवेदी ने सपा के मंत्री कमाने में जुटे हैं वाली खबर को उदाहरण स्वरूप उठाते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि मुलायम सिंह क्या यूपी में महिलाओं के लुट रही आबरुओं से अनभिज्ञ हैं। अगर वे अपने मंत्रालय की कारगुजारी को जानते हुए भी कोई विरोध दर्ज नहीं करा रहे तो निश्चित तौर पर यह धृतराष्ट्र का चरित्र ओढ़ लेने जैसा है। साथ ही प्रवक्ता रामबाबू द्विवेदी ने ये भी कहा कि अपने बेटे दुर्योधन को अब मुलायम को समझाना चाहिए। सपा की करतूत से यूपी की जनता अच्छी तरह परिचित है। अब भविष्य में यूपी की जनता समाजवादी पार्टी को मौका नहीं देने वाली। इन सबके इतर रामबाबू द्विवेदी ने रामनगर की बद्हाली के तमाम उदाहरण उठाते हुए कहा कि रामनगर की जनता ने ग्राम्य विकास मंत्रालय अरविंद सिंह गोप को तो सौंप दिया लेकिन आज भी जनता झुग्गी झोपड़ी में रहने को मजबूर है।
मायावती को शूर्पनखा
वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद शरद त्रिपाठी ने मुलायम और मायावती को रावण व शूर्पनखा की उपाधि देते हुए कुशासन रूपी रावण को यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में नष्ट कर देने की बात को प्रमुखता से उठाया। वहीं मायावती को शुर्पनखा बताते हुए चुनावी नाक काटने की बात कही।
सत्ता के गलियारों से बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। या यूं कहें कि काफी पहले से चल रहा है। जिसमें नए रचे जा रहे हैं। तैयार हो रहे हैं। लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव 2017 किस आधार पर होंगे ये जानना काफी दिलचस्प होगा। क्योंकि जातिवाद तो है ही, सांप्रदायिक नमूने भी हम कई बार यूपी के जहन में लोटते हुए देख चुके हैं। हत्या, लूट, रेप से आए दिन अखबार सने रहते हैं, बहरहाल जनता कुछ बेहतर सोच कर ही विकल्प के रूप में चुनती है। मौका देती है। अब ये मौका किसके लिए होगा ये जानना काफी रोचक होगा।












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