यूपी का चुनावी बजट, अखिलेश का फोकस किसानों पर
सूबे की स्थिति को हम सभी लगभग बखूबी समझते हैं। उत्तम की असलियत को भी यूपीवासियों से बेहतर भला कौन जान सकता है। लेकिन दावे और वादे मुफ्त के हैं। फिर क्या चिपकाते रहिए। बताते रहिए खुद को लोगों का हिमायती। उत्तर प्रदेश के मुखिया और वित्त मंत्रालय का भी कार्य भार संभाले अखिलेश यादव ने आज विधानसभा में बजट पेश किया। हालांकि सीएम साहब के मिजाज कुछ और ही थे।
पढ़ें- अखिलेश यादव के बजट के मुख्या बिंदु

शेर-ओ-शायरी के रंग में डूबे यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जनता के लिए जिसके मन में प्यार नहीं है, जनतंत्र में वह कुर्सी का हकदार नहीं है। कहीं आप भी तो वाह...वाह नहीं करने लगे। वैसे शायरी बढ़िया थी। लेकिन सपा के इस शासनकाल में यह शायरी उसी पर चरितार्थ होती दिखी। जिसके कारण संभव है कि खुद को समाजवादी बताने वाले नेता इस शायरी के बाद अपने कॉलर में न झांकने लगे हों।
2017 चुनाव के मद्देनजर लोकलुभावन है बजट
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अगले वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 3,46,935 करोड़ का लोकलुभावन बजट पेश किया। बतौर वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाले हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बजट चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में 14.6 फीसदी अधिक है। जनता का मानना है कि चुनाव को करीब देखते हुए सरकार ने लोकलुभावन बजट पेश किया है। कुल खर्च में 2,53,354 रूपये राजस्व लेखे का खर्च है तथा 93,580 करोड़ 24 लाख रूपये पूंजी लेखे का व्यय है।
बुंदेलखंड को दिखाई बजट की चमक
सूखे और बद्हाली की बरसों से मार झेलने वाले बुंदेलखंड की विशेष योजनाओं के लिए निधि का आकार 71 करोड़ 50 लाख से बढ़ाकर 200 करोड़ रूपया किया गया है। जिसमें पेयजल के लिए 200 करोड़, ग्रामीण पेयजल योजना के लिए 500 करोड़, विशेष योजनाओं के लिए 338 करोड़, टैंकर द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए 2 करोड़ तथा तिलहन प्लांट के लिए 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। हालांकि इस पर जनता ने क्या कहा आईये जानते हैं।
बुंदेलखंड के किसान राम खिलावन कहते हैं, "सब जानते हैं कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं। बस उसी को ध्यान में रखकर बुंदेलखंड की जनता के सामने सियासी निवाला डाला गया है। अगर अखिलेश यादव इतने ही हिमायती हैं तो 28 रूपये की चेक बांटकर हमारी गरीबी का मजाक नहीं उड़ाया जाता। बार-बार सरकार से सहयोग की उम्मीद को बांधकर हम थक चुके हैं।"
सूबे में 24 घंटे बिजली का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016 में ग्रमीण क्षेत्रों को 16 घंटे जबकि शहरी क्षेत्रों को 22 घंटे आपूर्ति का लक्ष्य रखा। इसके अलावा वर्ष 2019-2020 से 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या है आम बजट में खास-
- आबकारी और वैट में 10-10 फीसदी वृद्धि की गई है।
- समाजवादी पेंशन योजना का दायरा बढ़ाकर 55 लाख किया गया है।
- गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 1336 करोड़
- 55 जिलों में ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों के लिए 44.98 करोड़
- गोंडा में एग्रीकल्चर यूनिवसिटी खोलने की घोषणा
- लोहिया आवास के लिए 1774 करोड़
- स्मार्ट गांवों के लिए 300 करोड़
- आगरा में पेयजल के लिए 300 करोड़
- अब्दुल कलाम और ऊर्जा योजना के लिए 50 करोड़
- कानपुर-वाराणसी मेट्रो के लिए 50-50 करोड़
बजट में सूबे के मुखिया ने शिक्षा, स्वास्थ्य को भी काफी अहमियत दी है। लेकिन जनता इस अहमियत के पीछे 2017 यूपी विधानसभा चुनाव को मुद्दे के तौर पर रख रही है। निश्चित ही विकास के लिए लालच से इतर हटकर जिम्मेवारी से प्रयास करने होंगे। वरना फायदे की राह में यूपी विकास की रफ्तार में अन्य शहरों की अपेक्षा हमेशा हमेशा के लिए कई कदम पीछे ही खड़ा नजर आएगा।












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