बिहार के इस नेता के नाम दर्ज है केन्द्र में सबसे अधिक समय तक मंत्री रहने का रिकॉर्ड
पटना। बिहार के कई नेताओं ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी गहरी छाप छोड़ी है। जगजीवन राम ऐसे ही यशस्वी नेताओं में एक हैं। केन्द्र सरकार में सबसे अधिक समय तक मंत्री रहने का रिकॉर्ड बाबू जगजीवन राम के नाम पर दर्ज है। वे भारत सरकार में 30 साल तक मंत्री रहे हैं। एक सांसद के लिए इससे अधिक गौरव की बात कोई दूसरी नहीं हो सकती। इतना ही नहीं जगजीवन राम अपने जीवन में कभी चुनाव नहीं हारे। वे बिहार के सासाराम से लगातार आठ बार सांसद चुने गये। बिहार की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार उनकी पुत्री हैं और 2019 में वे सासाराम से ही कांग्रेस के टिकट पर फिर चुनाव लड़ रही है।

मंत्री के रूप में जगजीवन राम का रिकॉर्ड
जगजीवन राम भारत के ऐसे राजनेता हैं जो केन्द्र सरकार में कुल मिलाकर 30 साल तक मंत्री रहे। किसी नेता के केन्द्रीय मंत्री रहने का ये अधिकतम समय है। हालांकि लगातार केन्द्रीय मंत्री रहने का नेशनल रिकॉर्ड पंजाब के नेता स्वर्ण सिंह ने बनाया है। वे लगातार 24 साल तक केन्द्रीय मंत्री रहे थे। लेकिन जगजीवन राम अलग अलग अवधि में उनसे छह साल अधिक इस पद पर रहे। आजादी के पहले 1946 में जब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अंतरिम सरकार बनायी तो उसमें जगजीवन राम को श्रम मंत्री बनाया गया था। उस समय वे नेहरू कैबिनेट के सबसे युवा मंत्री थे। तब उनकी उम्र केवल 38 साल ही थी। आजाद के बाद जब पंडित नेहरू ने जब पहली सरकार बनायी तो उसमें जगजीवन राम को संचार मंत्री बनाया गया। 1956 से 1962 तक वे परिवहन और रेल मंत्री रहे। 1962-63 तक वे परिवहन और संचार मंत्री रहे। 1966 से 1967 तक श्रम, पुनर्वास और रोजगार मंत्री रहे। 1967 से 1970 तक कृषि मंत्री रहे। 1970 से 1974 तक रक्षा मंत्री रहे। 1974 से 1977 तक कृषि और सिंचाई मंत्री रहे। 1977 में वे कांग्रेस से अलग हो गये थे। फिर वे मोरारजी सरकार में मंत्री बने थे।

मंत्री के रूप में सबसे बड़ी उपलब्धियां
जगजीवन राम जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के प्रिय नेता रहे थे। एक मंत्री के रूप में जगजीवन राम की दो बड़ी उपलब्धियां देश को हमेशा याद करेगा। भारत में 1967 से 1970 के बीच जो हरित क्रांति हुई थी उस समय देश के कृषि मंत्री जगजीवन राम ही थे। हरित क्रांति के बाद ही भारत अन्न के मामले में आत्मनिर्भर हुआ था। नहीं तो इसके पहले देशवासियों का पेट भरने के लिए दूसरे देशों से अनाज मंगाना पड़ता था। जगजीवन राम की दूसरी सबसे बड़ी कामयाबी रक्षा मंत्री के रूप में है। 1971 में जब भारत की सेना ने पाकिस्तान को हराया था उस समय रक्षा मंत्री जगजीवन राम ही थे। उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, रक्षा मंत्री जगजीवन राम और जनरल मानेकशा ने युद्ध की जो सफल रणनीति बनायी आज वो गौरवपूर्ण इतिहास है।

बिहार के सांसद जो उप प्रधानमंत्री बने
जगजीवन राम इंदिरा गांधी के समर्थक थे। लेकिन इमरजेंसी के मुद्दे पर उनका इंदिरा गांधी से विरोध हो गया। 1977 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर अपनी खुद की पार्टी बनायी जिसका नाम था- कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी। 1977 के चुनाव में जगजीवन राम फिर सासाराम से खड़ा हुए। वे तो जीते ही उनके दल के 27 अन्य उम्मीदवार भी लोकसभा के लिए चुने गये। अपने दम पर देश भर में 27 उम्मीदवारों को सांसद बना कर जगजीवन राम ने दिखा दिया था कि देश की राजनीति में उनकी कितनी गहरी पैठ है। दलित नेता हुए भी वे सभी वर्गों में समान रूप से लोकप्रिय थे। जगजीवन राम के सहयोग से 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार बनी थी। उस समय जगजीवन राम को उप प्रधानमंत्री बनाया गया था। उन्हें रक्षा मंत्रालय की जिम्मेवारी दी गयी। 1979 में मोरारजी सरकार के पतन तक वे इस पद बने रहे। एक मंत्री के रूप में उनका ये अंतिम कार्यकाल साबित हुआ। जनता पार्टी के पतन के बाद जगजीवन राम ने फिर एक नयी पार्टी बनायी जिसका नाम कांग्रेस जे रखा था। 1980 में इंदिरा गांधी की फिर लहर चली। लेकिन जगजीवन राम सासाराम में चुनाव जीतने में सफल रहे। 1984 में इंदिरा गांधी हत्या की सहानुभूति लहर में भी जगजीवन राम ने अपनी ये सीट बचाये रखी थी। 1986 में जब उनकी मौत हुई तब वे सांसद थे। उनकी पु्त्री मीरा कुमार इस सीट पर 2004 और 2009 में चुनाव जीत चुकी हैं। 2014 में वे हार गयी थीं। 2019 में वे फिर भाग्य आजमा रही हैं जहां उनका मुकाबला भाजपा के छेदी पासवान से है।
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