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कौशांबी सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर हुई साफ, जानिए किनके बीच है टक्कर

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कौशांबी। उत्तर प्रदेश की कौशांबी लोकसभा के लिए भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर ने भी अपना नामांकन कर दिया है। नामांकन के साथ ही अब कौशांबी लोकसभा सीट पर राजनैतिक स्थिति स्पष्ट होने लगी और मैदान में लड़ाई किसके-किसके बीच होगी यह अब साफ नजर आने लगा है। कौशांबी लोकसभा में अभी तक मुकाबला त्रिकोणीय नजर आ रहा है। हालांकि, अभी यह शुरुआत का माहौल है और पहले प्रत्याशी घोषित करने वाले प्रत्याशी हमेशा बढ़त बनाते नजर आते हैं लेकिन मतदान जैसे-जैसे नजदीक आता है, जातिगत राजनीति हावी होने लगती और पार्टी का नाम पर अपनी छाप छोड़ने लगता है, जिससे समीकरण बनने बिगड़ने लगते है। ऐसे में अभी बढ़त बनाये राजा भैया की पार्टी व पीछा कर रहे गठबंधन के साथ तीसरे नंबर पर खिसकी भाजपा आगे बड़े बदलाव वाले समीकरण से गुजरेगी।

राजा भैया का दिखने लगा असर

राजा भैया का दिखने लगा असर

शुरुआती आंकड़ों को देखें तो पहले नंबर पर राजा भैया की पार्टी के प्रत्याशी पूर्व सांसद शैलेन्द्र नजर आ रहे हैं, जो न सिर्फ समाजवादी पार्टी के वोट खाने में सेंध लगाने में सफल हो रहे हैं, बल्कि बसपा के उन वोटों को सीधे तौर पर हथिया रहे हैं, जो इंद्रजीत के बसपा छोड़ने के बाद नाराज थे। बसपाईयों का एक बड़ा गुट इंद्रजीत से नाराज चल रहा है और उससे नजदीकी बढ़ाने में अब तक तीन जनसभा शैलेन्द्र कर चुके हैं। वहीं, शैलेन्द्र खुद समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रहे, लेकिन राजा भैया से दोस्ती व कौशांबी से टिकट कटने की संभावनाओं को देखते हुये इस बार वह सपा छोड़कर अपनी नयी सियासी जमीन पर फुटबाल खेल रहे हैं। वह अपने गुट के सपा नेता व कार्यकर्ताओं को अब तक या तो साथ जोड़ चुके हैं या तो अंदर ही अंदर उनका समर्थन मिला हुआ है। इसके अलावा राजा भैया की लोकप्रियता इस इलाके में बहुत अधिक है, खासकर कुंडा व बाबा इलाकों में राजा भैया को एकतरफा जनसमर्थना मिलता है। जिसके कारण यहां से राजा भैया की पार्टी कहीं अधिक मजबूत नजर आ रही है।

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गठबंधन की तगड़ी दावेदरी

गठबंधन की तगड़ी दावेदरी

इसी लड़ाई में दूसरे नंबर पर अभी तक के आंकड़ों के अनुसार गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज है। जिनकी मजबूती का आंकलन दोनों दलों के मूल मतदाता है। चूंकि यहां पर सपा और बसपा दोनों के पास पर्याप्त बल है और वह हर चुनाव में फाइट करते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार होगा जब इन दोनों पार्टियों के मतदाता एक जगह वोट करने की रणनीति पर काम करेंगे। चूंकि बसपा से सपा में आने के बाद इंद्रजीत को कौशांबी से टिकट दिया गया है, जिससे कई सालों से टिकट की दावेदारी कर रहे सपा नेताओं में मनमुटाव बना हुआ है। वहीं बसपा के मूल वोटर भी मनमुटाव से भरे हैं, लेकिन संभावना है कि जब सपा बसपा के मुखिया संयुक्त रैली करेंगे और वोटिंग की अपील करेंगे तो अपनों का दर्द खत्म होगा और इंद्रजीत को वोट मिलेंगे। हालांकि, अखिलेश के चाचा शिवपाल की पार्टी भी इस सीट से मैदान में है और बसपा के बागी नेता गिरीश को कांग्रेस ने टिकट दिया है। यह दोनों भी गठबंधन की दावेदारी को कमजोर करने में लगे हुए हैं। गठबंधन के पास वोट तो हैं लेकिन चुनौती है कि उन वोटों को अपने पक्ष में हासिल करना, जिसमें कम से कम अभी तक तो बिखराव की स्थिति है।

भाजपा कह बड़े नेता कराएंगे वापसी

भाजपा कह बड़े नेता कराएंगे वापसी

कौशांबी लोकसभा सीट के आंकड़े यह बताते हैं कि मौजूदा सांसद विनोद सोनकर अभी उस स्थिति में नहीं आ पाये हैं, जहां से वह अन्य प्रत्याशियों पर लीड ले सकें। अभी वह अपनी हर चुनावी जन सभा में पीएम मोदी के नाम पर वोट मांग कर अपनी स्थिति को साबित भी कर रहे हैं। चूंकि सत्ता में रहने वाले प्रत्याशी से नाराजगी हमेशा ही बन जाती है, ऐसे में थोड़ा बहुत नुकसान होगा, लेकिन भाजपा के पास इस इलाके में मजबूत वोट बैंक है। खुद केशव मौर्य का यह पैतृक इलाका है और यहां सोनकर ने पिछले साल में काफी काम भी किया है। ऐसे में अगर पीएम मोदी इस इलाके में माहौल बनाने आये तो पिछले चुनाव की तरह इस बार भी स्थिति बदलेगी। फिलहाल, सोनकर के पक्ष से भाजपा के मूल वोटर कहे जाने वाले ब्राहम्ण ठाकुर वोट में राजा भैया की सेंधमारी के चलते ही वह नीचे खिसके हैं। जिसे ठीक करने के लिऐ वह जातिगत स्टार प्रचारको को मैदान में उतराने की तैयारी भी कर रहे हैं। सोनकर की भी नजर बसपा के वोटरों पर हैं। जिन्हें विधानसभा में बसपा को वोट करने की तो आदत है, लेकिन लोकसभा में वह स्वतंत्र दिखाई पड़ते हैं। अगर उसी स्वतंत्रता का एहसास इस बार भी बसपा मतदाताओं ने किया तो सोनकर का नीचे से उपर आना तय माना जा रहा है।

कांग्रेस ने गिरीश चंद को मैदान में उतारा

कांग्रेस ने गिरीश चंद को मैदान में उतारा

कौशांबी लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने गिरीश चंद को मैदान में उतारा है और कई बार ब्लॉक प्रमुख के तौर पर सियासी मौजूदगी दर्ज कराने वाले गिरशी चंद जमीनी नेता माने जाते हैं। हालांकि, वह बसपा छोड़कर आए हैं और ऐसे में बसपा को कमजोर करने में वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाले हैं और पूरी संभावना है कि बसपा के मूल वोटरों का बड़ी संख्या में जुड़ाव वह हासिल करेंगे। जबकि कांग्रेस के मूल वोटर के साथ गिरीश की उपस्थिति यहां नजर आएगी। हालांकि, प्रियंका अगर इस इलाके में जनसभा करने पहुंची तो गिरीश को हार जीत का खेल बिगाड़ने और लड़ाई के मैदान में आने की संभावना है। जबकि, इस सीट से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राजदेव ने भी नामंकन कर दिया है और शिवपाल खेमे के वोटों को बटोरने और सपा को कमजोर करने के साथ यह अपने लिये सियासी जमीन तैयार करते नजर आ रहे है।

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कौशाम्बी की जंग, आंकड़ों की जुबानी
  • Vinod Sonkar
    विनोद सोनकर
    भारतीय जनता पार्टी
  • Girish Chand Pasi
    Girish Chand Pasi
    इंडियन नेशनल कांग्रेस

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English summary
bjp candidate vinod sonkar files nomination from kaushambi
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