'पाखंड को बढ़ावा दे रहे' बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कुछ यूं साधा निशाना
Swami Prasad Maurya On Dhirendra Shastri: सपा के राष्ट्रीय महासचिव और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'वह सिर्फ और सिर्फ पाखंड को बढ़ावा दे रहे हैं।'

Swami Prasad Maurya: रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाने के बाद से सपा के राष्ट्रीय महासचिव और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य मीडिया की सुर्खियों में बने हुए है। तो वहीं, अब उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री को भी आड़े हाथों लेते हुए तीखा प्रहार किया है। दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, 'वह सिर्फ और सिर्फ पाखंड को बढ़ावा दे रहे हैं।' दरअसल, कानपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बातें करते हुए कही।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य सोमवार को पूर्व मंत्री भगवती प्रसाद सागर की बेटी में शामिल होने कानपुर पहुंचे थे। यहां बर्रा स्थित गेस्टहाउस में उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए मौर्य ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हालांकि, उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री को ढोंगी करार देते हुए कहा, 'मैं उनके पास कभी नहीं जा सकता। वह पाखंड को बढ़ावा दे रहे हैं।'
मौर्य ने कहा कि दुनिया आज चांद पर जाने की बात कर रही है यह लोग देश को और पीछे धकेल रहे हैं। धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, उन्हें लूट रहे हैं। दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री ने स्वामी प्रसाद मौर्य को उनके पास आकर रामचरित मानस का ज्ञान लेने की बात कही थी। जिसपर स्वामी मौर्य ने भी उनके ऊपर पलटवार करते हुए कहा है कि वह सिर्फ लोगों को ठग रहे हैं और लूट कर रहे हैं और देश भर में पाखंड फैला रहे हैं।
इतना ही नहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने अयोध्या के संत राजू दास द्वारा उनका सिर कलम करने वाले को 21 लाख का इनाम देने के ऐलान पर कहा कि, 'हर असंभव कार्य को संभव करने का नौटंकी करने वाले एक धाम के बाबा की धूम मची है। आप कैसे बाबा है जो सबसे सशक्त पीठ के महंत होने के बावजूद सिर तन से जुदा करने का सुपारी दे रहे हैं, श्राप देकर भी तो भस्म कर सकते थे। 21 लाख ₹ भी बचता, असली चेहरा भी बेनकाब न होता।'
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स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश की महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ो के सम्मान की बात करने से तथाकथित धर्म के ठेकेदारों को मिर्ची क्यों लग रही है। आखिर ये भी तो हिन्दू ही हैं। क्या अपमानित होने वाले 97% हिन्दुओं की भावनाओं पर अपमानित करने वाले 3% धर्माचार्यों की भावनायें ज्यादा मायने रखती हैं।












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