कानपुर में मुहर्रम पर इस बार नहीं निकाला जाएगा पैकियों का जुलूस, 3 जून की हिंसा को देखते हुए लिया गया फैसला
कानपुर, 28 जुलाई: उत्तर प्रदेश के कानपुर में मुस्लिम समुदाय इस साल मुहर्रम पर पैकियों का जुलूस नहीं निकालेगा। समुदाय द्वारा यह निर्णय किसी भी अप्रिय घटना की संभावना से बचने के लिए लिया गया है। बता दें, बीते 3 जून को कानपुर में स्थानीय संगठन ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी के विरोध में बंद का आह्वान किया। इस दौरान हिंसक झड़पें हुई थीं। माहौल को देखते हुए और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पैकियों की दोनों तंजीमों के खलीफा ने यह निर्णय लिया है। जुलूस के वर्तमान प्रभारी कफील कुरैशी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस साल मुहर्रम के अवसर पर पैकी जुलूस नहीं निकाला जाएगा।

घरों में नमाज अदा करने की अपील
कफील कुरैशी ने कहा, "शहर के माहौल को ध्यान में रखते हुए इस साल पैकी जुलूस नहीं निकालने का फैसला किया गया है। हमने लोगों से इस मुहर्रम में अपने घरों में नमाज अदा करने और शहर में शांति बनाए रखने में मदद करने की अपील की है।" तंज़ीम निशान-ए-पाइक कासीद-ए-हुसैन के खलीफा शकील और तंज़ीम-अल-पाइक कासिद-ए-हुसैन के अच्छे मियां लोगों से चंदा लेकर हर साल जुलूस निकालते रहे हैं।
प्रशासन को कराया गया अवगत
खलीफा शकील ने कहा, ''इस साल पैकी का कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा। प्रशासन को इस बारे में अवगत करा दिया गया है। 3 जून की हिंसा के बाद शहर के माहौल को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हमने लोगों से ऐसे किसी भी काम में शामिल नहीं होने को कहा है, जिससे शहर की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।" संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि शहर के माहौल को देखते दोनों खलीफा इस बात के लिए सहमत हैं कि इस वर्ष पैकियों का जुलूस न निकाला जाए। इनका यह फैसला शहर के अमन और चैन के लिए है। उनकी धार्मिक सद्भाव भरी इस पहल का सभी को स्वागत करना चाहिए। -












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