बदकिस्मत बताकर करौली बाबा ने दिया था पहली पत्नी को तलाक, जानें कैसे बने अकूत संपत्ति के मालिक
Karauli Baba Santosh Singh Bhadauria: कभी खटारा से स्कूटर पर चलने वाले संतोष सिंह भदौरिया करौली बाबा आज कैसे बन गए अकूत संपत्ति के मालिक। जानिए उनके बारे कुछ खास बातें....

Karauli Baba: नोएडा के डॉक्टरों को बाउंसरों से पिटवाने के आरोपों में घिरे कानपुर जिले के करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया इन दिनों खासे चर्चाओं में हैं। करौली सरकार बनने से पहले कभी वह किसान संतोष सिंह भदौरिया हुआ करते थे, जो एक खटारा से स्कूटर पर चलते थे। लेकिन, झाड़ फूंक और तंत्र-मंत्र से बाधाओं और बीमारियों को दूर करने का दावा करते-करते आज अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे। आज करौली बाब संतोष सिंह के पास तीन रेंज रोवर कार हैं और उनके साथ हथियारबंद 20 गार्ड वाकी टॉकी के साथ चलते हैं। संतोष सिंह भदौरिया से करौली सरकार बनने ये कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है।
मनहूस मानकर पत्नी को दिया था 'तलाक'
गरीब परिवार में जन्मे संतोष सिंह भदौरिया शुरूआती दिनों से आर्थिक तंगी से जूझा करते थे। इस दौरान उन्होंने सोचा कि शादी के बाद शायद उनकी तकदीर बदल जाए। इसी के बाद करौली बाबा ने रेल बाजार में रहने वाली लड़की रेनू सिंह से शादी कर ली। मगर शादी के बाद भी उनकी माली हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। तो संतोष सिंह ने अपनी पत्नी रेनू को इसके लिए जिम्मेदार माना और मनहूस-बदकिस्मत बताकर शादी के तीन साल के अंदर-अंदर अपनी पत्नी को तलाक दे दिया और अलग हो गया। इसके कुछ समय बाद उसने ममता तिवारी से दूसरी शादी कर ली थी।
खटारा स्कूटर से चलने वाला संतोष सिंह बन बैठा अकूत संपत्ति का मालिक
संतोष की दूसरी पत्नी ममता का परिवार आर्थिक तौर पर मजबूत था और उसके नाम कल्यानपुर में एक प्लॉट भी था। खटारा स्कूटर से चलने वाले संतोष ने पत्नी के नाम जो प्लाट था उसे बेचकर प्रॉपर्टी का काम शुरू कर दिया था। लेकिन, ममता के भाईयों ने विरोध किया और फिर उसी प्लॉट के पैसे से उसके लिए टेंपो खरीदकर दे दिया। अब टेम्पों के सहारे उसका घर चल रहा था। इस दौरान ममता से उसके दो बेटे लव और कुश हुए। लेकिन, संतोष का मन अब भी नहीं लगा रहा था। उसे बहुत कम वक्त में अमीर बनना था
नेता बनकर कायम करना चाहता था वर्चस्व
करौली बाबा संतोष सिंह भदौरिया को जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने राजनीति में जाने का फैसला लिया। शुरुआत में संतोष सिंह ने शिव सेना ज्वाइन की। लेकिन, शिवसेना में उसे अपनी राजनीति चमकाने का कोई मौका नहीं मिला तो उसने शिवसेना को छोड़ दिया और भारतीय किसान यूनियन में किसान नेता बन गया। इस दौरान उसने किसानों को धरने-प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लिया। संतोष का उद्देश्य था कि भाकियू का राष्ट्रीय नेता बनकर अपना वर्चस्व कायम कर सके। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धरना प्रदर्शन के दौरान कई बार लाठियां खाने के बाद उसका नेता नगरी से भी मोहभंग हो गया। इसके बाद उसने भाकियू से भी दूरी बना ली।
अयोध्या प्रसाद हत्याकांड में आया था नाम
राजनीति से मन भरने के बाद संतोष सिंह भदौरिया ने एक बार फिर प्रॉपर्टी का काम शुरू कर दिया था। उसने विवादित जमीनों को खरीदना और बेचना शुरू कर दिया। इसके साथ ही उसने जमीनों पर कब्जा करना भी शुरू कर दिया था। संतोष ने बिधनू के करौली गांव में एक भदौरिया परिवार की जमीन को बेहद कम कीमत में खरीद ली। इस तरह से उसने सैकड़ों बीघा जमीन बना ली। इस दौरान 4 अगस्त 1992 को कानपुर के फजलगंज इलाके में अयोध्या प्रसाद नाम के एक शख्स का मर्डर हो गया था, जिसमें संतोष का नाम भी आया था।
करौली में खोला बेटों के नाम आश्रम
अयोध्या प्रसाद हत्याकांड में पुलिस ने संतोष सिंह भदौरिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन, 1993 में संतोष जमानत पर बाहर आ गया। इसके बाद संतोष ने केरल का रुख किया और वहां जाकर उसने अलग-अलग तरह की थैरेपी सीखी और कानपुर वापस आने के बाद आयुर्वेदिक एंव प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिविल लाइन में एक क्लीनिक खोला था, लेकिन संतोष भदौरिया को इसमें भी लाभ नहीं हुआ। इसके बाद साल 2012 में संतोष करौली गांव आ गया और अपने दोनों बेटों लव और कुश के नाम पर एक आश्रम खोल लिया और देखते ही देखते करौली सरकार बन गया।
14 एकड़ में फैल गया आश्रम
आश्रम की जमीन पर पहले एक मंदिर बनवाया गया था। लेकिन, करौली सरकार बनते ही जैसे-जैसे दुकान चलती गई तो आश्रम की जमीन भी फैलती गई। धीरे-धीरे आश्रम 14 एकड़ जमीन में फैल गया। आश्रम के साथ-साथ संतोष सिंह की अदृश्य शक्तियों और ताकतों की बातें भी फैलने लगी। इतना ही नहीं, लोग यूट्यूब पर वीडियो देखकर आश्रम पहुंचने लगे। करौली सरकार बाबा ओम शिव बैलेंस बोलकर लोगों की बाधाएं और बीमारियों को दूर करने लगे। कानपुर करौली बाबा को यूट्बर बाबा भी कहा जाता है।
बीते तीन सालों में बन बैठे अकूत संपत्ति के मालिक
बीते तीन वर्षों में करौली सरकार के पास देशभर लोग अपना इलाज कराने के लिए पहुंचने लगे। संतोष सिंह करौली बाबा के नाम से फेमस हो गया और आडंबर की दुकान से अकूत संपत्ति के मालिक बन बैठे। वहीं, अब चमत्कार की उम्मीद में मार खाकर वापस लौटे डॉक्टर सिद्धार्थ की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया और पूछताछ के लिए आश्रम भी पहुंची। इसके बाद से करौबी बाबा यू-ट्यूब के पर्दे से बाहर निकलकर न्यूज़ चैनल के पर्दों पर चमकने लगे हैं। इतना ही नहीं, करौली बाबा देखते ही देखते देश-विदेशों में और ज्यादा मशहूर हो गए हैं।












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