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kanpur: प्राथमिक विद्यालय में बच्चे को मिली 'तालिबानी सजा', शिक्षक ने कक्षा 7 के छात्र पर चला दी ड्रिल मशीन

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अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए बच्चों की पिटाई कर देना या उन्हें सजा देना, इस पर कई लोग अपने-अपने तर्क देते हैं। वहीं देश में कई कानून और गाइडलाइनंस हैं जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। लेकिन फिर भी स्कूलों में बच्चों को तालिबानी सजा देने के कई मामले स्कूल या शिक्षकों के खिलाफ दर्ज होते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के कानपुर से, जिसमे एक छात्र द्वारा 2 का पहाड़ा न सुनाने पर शिक्षक ने उसके हाथ पर ड्रिल मशीन चला दी। साथ में पढ़ने वाले दूसरे छात्र ने भागकर मशीन का तार निकाला तब जाकर छात्र की जान बच पाई।

हाथ में ड्रिल मशीन चला दी

हाथ में ड्रिल मशीन चला दी

दरअसल, उत्तर प्रदेश के कानपुर प्राथमिक स्कूल टीचर के द्वारा बच्चे को तालिबानी सजा देने का मामला सामने आया है। प्रेम नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय के कक्षा 7 के छात्र विवान से शिक्षक अनुज ने दो का पहाड़ा सुनाने को कहा। विवान पहाड़ा नहीं सुना सका जिससे गुसाए शिक्षक ने हैवानियत की हाडे पार करते हुए छात्र के हाथ में ड्रिल मशीन चला दी। ड्रिल मशीन से छात्र के हाथ में गंभीर चोट आ गई है। शिक्षक अनुज का यह हैवानी रूप देखकर साथी छात्र ने ड्रिल मशीन का तार निकाल दिया, जिससे छात्र की जान बच सकी। अन्य मौजूद बच्चों ने बताया कि प्रेम नगर के प्राथमिक स्कूल में कौशल विकास योजना के तहत संस्था के द्वारा कुछ पढ़ाया व समझाया जा रहा था। साथ ही शिक्षक ड्रिल मशीन से लगातार डरा रहा था और डराते डराते बच्चे के हाथ पर ड्रिल मशीन चला भी दी।

शारीरिक दंड, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह से प्रतिबंधित

शारीरिक दंड, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह से प्रतिबंधित

आइए जानते हैं कि बच्चों को सजा देने को लेकर भारत में क्या कानून है, क्या-क्या प्रावधान है ताकि स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
स्कूलों में कॉर्पोरल पनिशमेंट के तहत बच्चे में अनुशासन स्थापित करना गलत है। 'कॉर्पोरल पनिशमेंट' से मतलब शारीरिक और मानसिक सजा देना होता है। जिसमें चांटा मारने से लेकर कान खींचना शामिल हैं। इस तरह की सजाओं पर कई एक्सपर्ट का मानना है कि इससे बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। इसके परिणाम स्वरूप वह किसी भी तरह के कदम भी उठा सकते हैं।
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 में क्या कहा गया है?
शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 17 के तहत किसी भी तरह के शारीरिक दंड, मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 82 के तहत भी जेल और जुर्माने का प्रावधान है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 75 में कहा गया है कि बच्चे की देखभाल और उनकी सुरक्षा स्कूल की जिम्मेदारी होगी।

CBSE और NCPCR की गाइडलाइंस क्या कहती है?

CBSE और NCPCR की गाइडलाइंस क्या कहती है?

कई बार ऐसे मामले भी हो जाते हैं कि बच्चों के मां-बाप की शिकायत को स्कूल प्रबंधन या तो नजरअंदाज कर देते हैं या खारिज करते हैं। ऐसे में नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स यानि एनसीपीसीआर में जाकर भी शिकायत की जा सकती है।
एनसीपीसीआर बच्चों की सुरक्षा के लिए कई गाइडलाइंस जारी कर चुका है। जैसे स्कूल में जिन लोगों को नौकरी पर रखा जाता है, उनका पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से हो. स्टाफ से एफिडेविट लेना. वह पहले से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी नहीं होना चाहिए।
CBSE की गाइडलाइंस के तहत अगर स्कूल किसी भी नियम का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है. सीबीएसई ऐसी घटनाओं को लेकर कई बार स्कूलों को धारा 82 से अवगत करवाते आया है।
धारा 82 (1) के तहत फिजिकल पनिशमेंट देने पर शिक्षक को 10 हजार रुपए का जुर्माना हो सकता है। अपराध दोहराने पर तीन महीने की जेल का भी प्रावधान है। धारा 82 (2) के तहत शिक्षक को सस्पेंड कर दिया जाता है। वहीं धारा 82 (3) के तहत अगर जांच में सहयोग नहीं किया तो तीन माहीने की सजा का प्रावधान है. स्कूल पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

मां-बाप पुलिस में भी शिकायत करवा सकते हैं

मां-बाप पुलिस में भी शिकायत करवा सकते हैं

इसके अलावा भारत में जुवेनाइल जस्टिस नियम की धारा 23 के मुताबिक बच्चों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं की जा सकती है। शिक्षा का अधिकार (RTE) की धारा 17 के तहत बच्चों को सजा देने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। बच्चों के साथ गलत व्यवहार करने पर 2012 में एक विधेयक पारित किया गया है, जिसके मुताबिक बच्चों को फिजिकल पनिशमेंट देने पर शिक्षक को तीन साल की जेल हो सकती है।
IPC की धारा का भी हो सकता है इस्तेमाल
बच्चों की पिटाई के मामले में मां-बाप पुलिस में भी शिकायत करवा सकते हैं. यहां तक आईपीसी की धारा 323 (मारपीट), 324 (जख्मी करना), 325 (गंभीर जख्म पहुंचाना) के तहत भी मामला दर्ज हो सकता है.
धारा-325 तहत आरोप सिद्ध होने पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है. अगर बच्चे पर जानलेवा हमला किया गया हो तो फिर धारा-307 लगाया जा सकता है इसमें अधिकतम 10 साल या फिर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

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English summary
Kanpur: Child gets 'Talibani punishment' in primary school, teacher runs drill machine on Class 7 student
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