कानपुर में गेटमैन की लापरवाही से ट्रेन ने ट्रक को उड़ाया, दो लोगो की मौके पर हुई मौत
भारत में यह कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि सरकारी कर्मचारियों की ठाठ है, फिर चाहे वो किसी भी विभाग के हों, उच्च अधिकारी हों या निचले स्तर के कर्मचारी। बिजली विभाग के बाबू हों, सरकारी बैंकों में काम करने वाले अधिकारी हो, अस्पताल कर्मचारी हों या रेलवे के गेटमैन, सभी अपनी जिम्मेदारियों को चूल्हे पर रखकर बस ऐश करने में लगे हुए हैं। ऐसे ही एक रेलवे के गेटमैन की लापरवाही का खामियाजा जनता को दो जाने गवांकर भुगतना पड़ा। जानकारी अनुसार लापरवाही के चलते बीती रात करीब 11.39 मिनट पर वाराणसी से गाँधीधाम जा रही गाँधी कैप्टन एक्सप्रेस ने कानपुर क्रासिंग पर एक लोडर ट्रक को उड़ा दिया। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

नहर में जा गिरा लोडर
दरअसल पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर में थाना गजनेर क्षेत्र के जलालपुर रेलवे क्रासिंग का है। रात्रि करीब 11.28 बजे रेलवे क्रासिंग जलालपुर की गुमटी नम्बर 216A. सी / 2 ई पर गाँधी कैप्टन एक्सप्रेस गुजर रही थी। वहीं नवीपुर मार्ग की क्रासिंग पर मूसानगर की ओर से लोडर आ रही थी। रेलवे क्रासिंग गुमटी नम्बर 216A. सी / 2 ई खुली होने के चलते ट्रेन और लोडर में भीषण टक्कर हुई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि लोडर पास की एक नहर में जा गिरा। हादसे में लोडर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सुचना पर रेलवे समेत जिले के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुचे गए। वही पुलिस ने करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लोडर में फंसे लोडर चालक के शव को नहर से बाहर निकालकर दोनों शवो को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

अनियंत्रित ट्रेन विधुत लाइन के खम्बो में जा टकराई
मौके पर पहुचे अधिकारियो ने करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की सहायता से लोडर समेत लोडर में फंसे लोडर चालक के शव को नहर से बाहर निकाला। ट्रेन और लोडर की भीषण टक्कर के चलते ट्रेन भी अनियंत्रित हो गई और विधुत लाइन के खम्बो में जा टकराई। इससे करीब 6 खम्भों की विधुत लाइन टूट गई। जिसके चलते कानपूर झाँसी रेलवे टैक बाधित हो गया। रेलवे ट्रैक के कई खम्भों की बिधुत लाइन टूट जाने के चलते कानपुर झांसी रेलवे ट्रेक करीब 11.39 मिनट रात्रि से 4 बजे सुबह तक ठप रहा। झाँसी से मौके पर पहुचे रेलवे अधिकारियो ने डीजल इंजन के सहारे वैकल्पिक व्यवस्था कर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को रवाना किया। रेलवे के अधिकारी और टीम घटना की जाँच में जुट गई है।

हज़ारों करोड़ सरकारी कर्मचारियों पर होता है खर्च
आए दिन अख़बारों में और बड़े बड़े चैनलों पर कोई न कोई खबर ऐसी देखने को मिल ही जाती है जिसमे या तो किसी अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा जाता है या फिर अपने पद का गलत फायदा उठाते हुए। सरकारी नौकरी और सरकारी कर्मचारी को लेकर अब लोग एक दुसरे को चुटकुले सुनते नजर आते है। कोई कोई तो सरकारी कर्मचारी की मिसाल बस इसलिए ही देता है की सामने वाले को नीचा दिखाना होता है, जैसे कोई अपना काम अगर ढंग से और जिम्मेदारी से नहीं करता है तो उसको कहा जाता है कि क्या 'बिलकुल सरकारी बाबू समझ रहे हो खुद को।'
इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में एक सरकारी नौकर की क्या छवि है और इन्होने पब्लिक के साथ अपना क्या रिश्ता कायम किया है। सरकार हर साल हज़ारों करोड़ इन्ही कर्मचारियों पर खर्च कर देती है लेकिन इनको किसी के जीने मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। सरकार को अब इस मुद्दे को बहुत ही गंभीरता से लेना होगा नहीं तो 'सबका साथ और सबका विकास' बस एक कल्पना मात्र बनकर रह जाएगी।












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