शहीद के घर पहुंचे अखिलेश, बोले- PM-CM 'उरी' देख जश्न मनाते हैं तो बताएं जवानों की जान कैसे चली गई

Kannauj News, कन्नौज। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा (Pulwama Blast) में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर गुरुवार को हुए फिदायीन आतंकी हमले में शहीद हुए कन्नौज जिले के प्रदीप सिंह के घर पूर्व सीएम अखिलेश यादव पहुंचे। उन्होंने शहीदों के परिजनों को ढांढस बंधा। साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पुलवामा की घटना बड़ी चूक का नतीजा है। सवाल दागा कि सर्जिकल स्ट्राइक पर जश्न मनाने वाले बताएं, इतने सैनिकों की जान कैसे चली गई।

पुलवामा हमले में शहीद हुए प्रदीप सिंह यादव

पुलवामा हमले में शहीद हुए प्रदीप सिंह यादव

कन्नौज जिले का लाल इंदरगढ़ के सुखसेनपुर के रहने वाले प्रदीप सिंह यादव पुलवामा हमले में शहीद हो गया। वह उस बटालियन में शामिल थे, जिसे आंतकियों ने निशाना बनाया था। गुरूवार देर रात ये खबर उनके पैतृक घर पहुंची तो परिजनों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। जिले में शोक की लहर दौड़ गई। एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रदीप की शहादत की पुष्टि की है। प्रदीप सिंह यादव श्रीनगर में 115 बटालियन में सिपाही थे। चार दिन पहले छुट्टी से वापस लौटे थे। प्रदीप सिंह की पत्नी नीरज देवी अपनी दो बेटियां सुप्रिया यादव (10) और ढाई साल की सोना यादव के साथ कानपुर में रहती हैं। 10 फरवरी को परिवार से विदा होकर वह जम्मू रवाना हुए थे। 11 जनवरी को वह जम्मू पहुंचे थे।

शहीद के पहुंचे अखिलेश यादव

शहीद के पहुंचे अखिलेश यादव


शुक्रवार को पूर्व सीएम अखिलेश यादव शहीद के घर पहुंचे। पिता अमर सिंह और छोटे भाई कुलदीप से बातचीत की। शहीद की पत्नी नीरज और मां सरोजनी देवी के साथ ही 10 साल की बेटी सुप्रिया और ढाई साल की सोना के भी हालचाल पूछे। पुलवामा में हुई घटना पर दुख जताया। बोले, जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, दुर्भाग्य से उनकी ही जान इस घटना में चली गई। कहीं न कहीं यह बड़ी चूक है। जहां सड़क पर इतना बड़ा मूवमेंट चल रहा हो, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं थे। अभी तक इतनी बड़ी घटना नहीं हुई। हमने धरती मां के सच्चे सपूतों को खोया है।

'उरी' फिल्म पर जश्न मनाते है तो बताये जवानों की जान कैसे चली गई

'उरी' फिल्म पर जश्न मनाते है तो बताये जवानों की जान कैसे चली गई

देश के मामले में राजनीति के सवाल पर बोले, मंत्री और मुख्यमंत्री उरी फिल्म देखकर यदि सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मनाते हैं तो यह भी बताना होगा कि जवानों की जान कैसे चली गई। इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई। आपको बताना होगा कि आखिर चूक कहां से और कैसे हुई। सवाल किया, क्या जवान की ऐसे ही जान जाएगी।

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