झारखंड विधानसभा में नमाज अदा करने के लिए अलग से कमरा अलॉट, सोशल मीडिया पर हंगामा
रांची। शुक्रवार को झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के तहत झारखंड विधानसभा में नमाज अदा करने के लिए अलग से कक्ष आवंटित किया गया है। इस संबंध में शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से आदेश जारी कर दिया गया है। विधानसभा के उप सचिव नवीन कुमार के हस्ताक्षर से जारी किये गए आदेश में कहा गया है कि नये विधानसभा भवन में नमाज अदा करने के लिए नमाज कक्ष के रूप में कमरा संख्या TW-348 आवंटित किया जाता है। आदेश की प्रति सोशल मीडिया में शेयर हो रही है। सवाल उठाये जा रहे हैं कि क्या अन्य धर्मों की उपासना के लिए भी विधानसभा में कोई कमरा आवंटित किया गया है।

भाजपा ने फैसले के खिलाफ उठाया सवाल
वहीं इस मामले पर कई नेताओं ने प्रतिक्रिया भी देनी शुरू कर दी है। अब बीजेपी ने इस आदेश पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि बहुसंख्यक विधायकों की भावना का ख्याल रखते हुए विधान सभा में मंदिर का निर्माण हो। हालांकि जेएमएम का कहना है कि ये व्यवस्था पुरानी है।
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पूर्व सीएम ने कहा- वोट बैंक की राजनीति
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ये सब वोट बैंक की राजनीति है। तुष्टिकरण के लिए ये सब हो रहा है। लोकतंत्र के मंदिर पर सरकार ने धब्बा लगाया है। नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर लिखा कि झारखंड की विधानसभा में नमाज की व्यवस्था भारत के संविधान के सिद्धांतों के साथ खिलवाड़ हैं। झारखंड के निर्माण का उद्देश्य आदिवासियों का विकास था, लेकिन तुष्टिकरण की अंधी दौड़ में आदिवासियों का भी अपमान किया जा रहा हैं। नमाज के ये आदेश अनुचित है, और वापस लिया जाना चाहिए।

झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- बहुत चिंतित हूं इस फैसले से
वहीं झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा विधायक भानू प्रताप शाही ने ट्वीट कर लिखा कि बहुत चिंतित हूँ , झारखंड के भविष्य को ले कर । एक तरफ़ कांग्रेस के विधायक खुलेआम तालिबान का समर्थन करते हैं ! दूसरी तरफ़ विधानसभा में नमाज़ की कक्ष खोली जा रही और तीसरी हिंदी को हटा कर उर्दू को प्रथमिकता नियोजन नीति में दी जा रही ? किस दिशा में जा रहा झारखंड आप भी सोचें। वहीं भाजपा नेता बाबू लाल मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र का मंदिर लोकतंत्र के मंदिर के रूप में ही रहना चाहिए। (झारखंड विधानसभा) में नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित करना गलत है। हम इस फैसले के खिलाफ हैं












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