Pooja Singhal IAS: कौन हैं राम विनोद सिन्हा, जिसने खोल दी इनके काले कारनामे की पोल

रांची, 9 मई: झारखंड की सीनियर आईएएस पूजा सिंघल के काले कारनामों में एक महत्वपूर्ण कड़ी राम विनोद प्रसाद सिन्हा का भी जुड़ा है, जिसे तीन साल तक तलाश के बाद दो साल पहले पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया था। दरअसल, सिन्हा झारखंड के खूंटी जिले में एक सरकारी जूनियर इंजीनियर था, जिसका बयान ही अब सिंघल और उनके परिवार वालों के लिए बहुत बड़ी मुश्किल की वजह बन गया है। सिन्हा ने प्रवर्तन निदेशालय को साफ बता दिया कि वह जिलाधिकारी कार्यालय तक कितनी रिश्वत पहुंचाता था।

कैसे भरा झारखंड की खनन सचिव का खजाना ?

कैसे भरा झारखंड की खनन सचिव का खजाना ?

झारखंड में नकद की 'खान' बनीं आईएएस पूजा सिंघल से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी है, उनके काले कारनामों से जुड़े अहम सुराग भी हाथ लगे हैं। ईडी ने अभी तक सिंघल के पति अभिषेक झा, उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार और एक कारोबारी समेत कुछ करीबियों के ठिकानों पर दबिश दी है, जिसमें 19 करोड़ से भी ज्यादा कैश मिलने की बात सामने आई है। लेकिन, माना जा रहा है कि वर्षों पहले हुए मनरेगा घोटाले की जांच उनके गिरेबान तक पहुंचने में झारखंड के एक बर्खास्त जूनियर इंजीनियर राम विनोद प्रसाद सिन्हा के बयान ने अहम भूमिका निभाई है। उस जूनियर इंजीनियर ने ईडी के सामने वह सारा राज उगल दिया, जिसने झारखंड की खदान विभाग की सचिव का खजाना भरने में काफी मदद की थी।

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    IAS Puja Singhal Case: एक जेई के बयान से मुश्किल में फंसा पूजा सिंघल और उसका परिवार | वनइंडिया हिंदी
    कौन हैं राम विनोद सिन्हा ?

    कौन हैं राम विनोद सिन्हा ?

    प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के जूनियर इंजीनियर राम विनोद सिन्हा को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 17 जून, 2020 को कोलकाता से धर-दबोचा था। वह उससे पहले तीन साल से फरार चल रहे थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई में उनके पास से आय से 679% ज्यादा की संपत्ति मिली थी। यह मामला खूंटी जिला के मनरेगा फंड से जुड़ा है, जिसमें 2006 से 2010 के बीच 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम का हेरफेर किया गया था। इनकी पत्नी और परिवार के कुछ और सदस्यों के खिलाफ भी सबूत पाए गए थे। ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बर्खास्त इंजीनियर की करीब 4.25 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त कर चुका है।

    जूनियर इंजीनियर ने कैसे खोली आईएएस पूजा सिंघल की पोल ?

    जूनियर इंजीनियर ने कैसे खोली आईएएस पूजा सिंघल की पोल ?

    प्रवर्तन निदेशालय ने अभी झारखंड की वरिष्ठ आईएएस सिंघल और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ छापेमारी की जो बड़ी कार्रवाई की है,उसमें बर्खास्त इंजीनियर सिन्हा के कबूलनामे को ही बड़ा आधार माना जा रहा है, जिसके खुलासे ने ईडी को उनके खिलाफ अहम जानकारियां जुटाने में मदद की है। खूंटी में जो करोड़ों का मनरेगा घोटाला हुआ था, उसमें सिन्हा के खिलाफ जांच के दौरान ही वहां की तत्कालीन डीसी (जिलाधिकारी) का भी रोल सामने आया था। उस समय अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री थे और उन्होंने जांच का आदेश भी दिया, लेकिन एसीबी की जांच शुरू नहीं हो पाई। बाद में झारखंड हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की गई, जिसके बाद ईडी ने कोर्ट को बताया कि पूजा सिंघल की भी जांच हो रही है। ईडी ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि राम विनोद सिन्हा ने 5% कमीशन सीनियर अफसरों के नाम पर और 5% डीसी ऑफिस के नाम पर लेने की बात मानी है। पूछताछ में जूनियर इंजीनियर की ओर से प्रवर्तन निदेशालय को बताया गया कि 'उसकी ओर से जिला प्रशासन को 5% बतौर कमीशन दिया गया।' वैसे विभागीय जांच में आईएएस सिंघल को बेदाग बता दिया गया था।

    आईएएस पूजा सिंघल के खेल में सीए भी बड़ा 'खिलाड़ी'

    आईएएस पूजा सिंघल के खेल में सीए भी बड़ा 'खिलाड़ी'

    ईडी की जांच जारी रही और पाया गया कि खनन सचिव सिंघल और उनके पति अभिषेक झा के बैंक खातों में उनकी आय से 1.43 करोड़ रुपये की ज्यादा रकम पड़ी हुई है। जांच एजेंसी को लगता है कि यह रकम 2000 बैच की आईएएस ने विभिन्न जिलों की डीसी और बाकी महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए जुटाई है। ईडी ने रांची की पीएमएलए कोर्ट को यह भी बताया है कि सिंघल ने अपने निजी खाते से अपने सीए सुमन कुमार के कंट्रोल वाले अकाउंट में 16 लाख रुपये से ज्यादा की रकम ट्रांसफर किए हैं। उनके सीए को धोखाधड़ी के आरोपों में शनिवार को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। ईडी उनके पति से भी लगातार पूछताछ कर रही है।

    अबतक 19.31 करोड़ रुपये की बरामदगी

    अबतक 19.31 करोड़ रुपये की बरामदगी

    6 मई को देश भर में सिंघल से जुड़े कई ठिकानों पर हुई कार्रवाई के बारे में प्रवर्तन निदेशालय ने बताया है कि सीए सुमन कुमार के घर और दफ्तरों से 17.79 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश मिले हैं और अभी तक कुल 19.31 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई है। सीए पर कैश का स्रोत छिपाने का और असली मालिक की जानकारी दबाने का भी आरोप है। इसी वजह से उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एजेंसी का आरोप है कि 2007 से 2013 के बीच पूजा सिंघल ने तीन जिलों की उपायुक्त रहते हुए अपने खातों में मोटी रकम जमा की और काफी धन का इस्तेमाल एलआईसी योजनाओं के लिए भी किया। सिंघल 2007 से 2013 के बीच चतरा, खूंटी और पलामू जिलों की उपायुक्त रह चुकी हैं।

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