झारखंड विधानसभा में भारी पड़ सकता है हेमंत सरकार पर बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा, केंद्र ने भी अब घेरा
विधानसभा चुनावों से पहले झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में जनसांख्यिकी बदलने को लेकर चल रही राजनीति के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अब झारखंड हाई कोर्ट की एक खंडपीठ को बताया है कि साहिबगंज और पाकुड़ जिलों में घुसपैठ होने का अनुमान है। इसे रोकने के लिए झारखंड सरकार का समर्थन अपेक्षा से कम रहा है।
केंद्र सरकार झारखंड में एक भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दायर 2022 की जनहित याचिका (पीआईएल) का जवाब में झारखंड हाई कोर्ट में ये बातें कही हैं। पीआईएल में कहा गया था कि संथाल परगना में अनुसूचित जनजाति की आबादी कम हो रही है क्योंकि "बांग्लादेश से अवैध घुसपैठिए" क्षेत्र में बस रहे हैं। इतना ही नहीं, जमीन और प्रभाव हासिल करने के लिए एसटी परिवारों में शादी कर रहे हैं।

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संथाल परगना की आदिवासी जनसंख्या में लगातार गिरावट
गृह मंत्रालय के अवर सचिव के माध्यम से 12 सितंबर को दायर अपने हलफनामे में केंद्र ने कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के आंकड़ों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय के आंकड़ों से पता चलता है कि संथाल परगना की आबादी में एसटी का हिस्सा 1951 में 44.67% और 2011 में 28.11% था।
हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि "बाहरी प्रवास, आदिवासियों के बीच कम जन्म दर, ईसाई धर्म में धर्मांतरण और अन्य कारणों से आदिवासी आबादी में कमी की मात्रा का भी आकलन किया जाना चाहिए।"
केंद्र ने यह भी कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां आदिवासियों से गैर-आदिवासियों को जमीन हस्तांतरित करने के लिए मौजूदा कानूनों में खामियों का दुरुपयोग किया गया है, जैसे हलफनामे के माध्यम से जमीन (दानपत्र) उपहार में देना।
उदाहरण देते हुए 18 जुलाई 2024 को पाकुड़ जिले में आदिवासियों और मुसलमानों के बीच हुए विवाद का एक उदाहरण दिया, जो कथित तौर पर इसी मुद्दे के कारण हुआ था। लेकिन इसमें कहा गया है कि इनमें से किसी भी भूमि संबंधी मामले में बांग्लादेशी अप्रवासियों से संबंध अभी तक स्थापित नहीं हुए हैं।
हलफनामे में कहीं भी गृह मंत्रालय ने संथाल परगना क्षेत्र में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को उसके द्वारा आंकी गई "घुसपैठ" से नहीं जोड़ा है। झारखंड उच्च न्यायालय ने अब जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए एक खोजी समिति बनाने पर विचार किया है और केंद्र और राज्य को इसके लिए नामों की सिफारिश करने को कहा है।

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भाजपा विधानसभा चुनाव में 'घुसपैठ' को लेकर हेमंत सरकार पर हावी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को संथाल परगना में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को बांग्लादेश से ''घुसपैठ'' से जोड़ने के लिए केंद्र के हलफनामे का इस्तेमाल किया है। गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे, झारखंड के विपक्ष के नेता अमर कुमार बाउरी (भाजपा), झामुमो के पूर्व वफादार चम्पाई सोरेन जैसे प्रमुख नेताओं ने इस मामले पर ट्वीट हेमंत सरकार को घेरा है।
जेएमम ने कहा- अगर बांग्लादेशी घुसपैठ है तो शाह को इस्तीफा दे देना चाहिए
द हिंदू के मुताबिक दूसरी ओर जेएमएम केंद्रीय समिति के सदस्य और प्रवक्ता मनोज पांडे ने से कहा कि अगर बांग्लादेशी घुसपैठ हो रही है तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वे केवल अंतरराष्ट्रीय सीमा के माध्यम से ही प्रवेश कर सकते हैं जो केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। जेएमएम ने कहा है कि ये केंद्र की विफलता है, वो इसे स्वीकार करने के बजाए, दूसरों को दोष दे रहे हैं।
आने वाले विधानसभा चुनावों झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ एक अहम मुद्दा बन गया है। स्थानीय अधिकारियों ने अवैध अप्रवासियों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की है। राज्य सरकार सीमा सुरक्षा बढ़ाने और आव्रजन कानूनों के सख्त प्रवर्तन सहित विभिन्न उपायों के माध्यम से इस समस्या को हल करने के लिए काम कर रही है।












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