बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर घिरी हेमंत सरकार, हाई कोर्ट ने भी फटकारा, BJP ने कहा- सब वोटबैंक है
झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे में झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के लिए ''अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों'' की चुनौती सबसे बड़ी बनी हुई है। बांग्लादेशी घुसपैठियों पर अब झारखंड हाई कोर्ट ने भी हेमंत सोरेन सरकार को फटकारा है। वहीं भाजपा का कहना है कि ये सब वोटबैंक की राजनीति है।
झारखंड हाई कोर्ट में संथाल परगना के 6 जिलों ( गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा, साहिबगंज, दुमका, देवघर) में बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने के लिए दायर याचिका पर 5 सितंबर को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों का झारखंड में प्रवेश खतरनाक स्थिति में है।

'बांग्लादेशी घुसपैठिए दूसरे राज्यों में घुसकर वहां की आबादी प्रभावित करेंगे'
हाई कोर्ट ने कहा, ''बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड से घुसकर अन्य राज्यों में भी प्रवेश कर सकते हैं और वहां की आबादी को प्रभावित कर सकते हैं। अगर समय रहते, इनको रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।''
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से संथाल के छह जिलों में आदिवासियों की संख्या घट रही है, जो एक गंभीर मामला है। केंद्र सरकार इस मामले पर अध्ययन कर रही है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार आईबी, बीएसएफ से विचार-विमर्श करके इस पूरे मामले पर जवाब दाखिल करेगी। कोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को तय की है।
भाजपा ने कहा- देश रहे न रहे लेकिन इनकी सरकार रहनी चाहिए
भाजपा ने कहा, ''वोटबैंक के लालच में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस मिलकर झारखंड को बर्बाद करने पर आमादा हो गए हैं। क्योंकि इन परिवारवादी ताकतों का सिर्फ एक ही मकसद है 'देश रहे न रहे लेकिन इनकी सरकार रहनी चाहिए।''
जेएमएम छोड़कर भाजपा में आने वाले चम्पाई सोरेन और लोबिन हेम्ब्रम ने भी दावा किया है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से राज्य में आदिवासियों की संख्या कम हो रही है।
चम्पाई सोरेन बोले- संथाल-परगना में दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां आदिवासी खोजने पर भी नहीं मिल रहे
चम्पाई सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर लिखा, ''संथाल-परगना में लगातार हो रही बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण आदिवासी समाज के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। वहाँ दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां आदिवासी खोजने पर भी नहीं मिल रहे। उदाहरण के तौर पर, पाकुड़ के जिकरहट्टी स्थित संथाली टोला में अब कोई संथाल परिवार नहीं रहता। इसी प्रकार मालपहाड़िया गाँव में आदिम जनजाति का कोई सदस्य नहीं बचा है। आखिर वहां के भूमिपुत्र कहां गए? उनकी जमीनों, उनके घरों पर अब किसका कब्जा है?''
चम्पाई सोरेन ने बताया किस-किस गांव में आदिवासी अस्मत खतरे में है?
चम्पाई सोरेन ने कहा, ''समाज के स्थानीय लोगों ने मुझे बताया कि बरहेट के गिलहा गांव में एक आदिवासी परिवार की जमीन पर जबरन कब्रिस्तान बनाया गया है। ऐसी घटनाएँ कई जगह हुई हैं। आप खुद देखिए कि वीर भूमि भोगनाडीह एवं उसके आस-पास कितने आदिवासी परिवार बचे हैं? बाबा तिलका मांझी एवं वीर सिदो-कान्हू ने जल, जंगल व जमीन की लड़ाई में कभी भी विदेशी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके, लेकिन आज उनके वंशजों की जमीनों पर घुसपैठिए कब्जा कर रहे हैं। हमारी माताओं, बहनों व बेटियों की अस्मत खतरे में है। हमारे लिए यह राजनैतिक नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दा है। अगर हम इस विषय पर खामोश रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।''












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