लव-लैंड-जिहाद और घुसपैठ का BJP का मुद्दा हुआ फुस्स, 28 आदिवासी रिजर्व सीट में से सिर्फ एक पर जीती BJP
Jharkhand Election 2024 Result: झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा घुसपैठ और लव-लैंड-जिहाद के मुद्दे को प्रमुख रूप से उठाया गया था, लेकिन चुनावी नतीजों से ये साफ हो गया है कि ये मुद्दा फुस्स हो गया है। भाजपा को उम्मीद थी कि आदिवासी रिजर्व 28 सीटों पर वो लव-लैंड-जिहाद और घुसपैठ का मुद्दा उठाकर आदिवासी वोटरों को अपनी ओर खीचेंगे लेकिन आदिवासी वोटरों ने बता दिया है कि उनका भरोसा अभी हेमंत सोरेन की सरकार में है।
भाजपा 28 आदिवासी रिजर्व सीट में से सिर्फ एक सीट जीत पाई है। वो सीट भी चम्पाई सोरेन की है। चम्पाई सोरेन सरायकेला से जीत पाए हैं। झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए यह मुद्दा कहीं ना कहीं पार्टी के लिए नुकसानदेह भी साबित हुआ। तो क्यों घुसपैठ का मुद्दा झारखंड में बीजेपी के लिए सफल नहीं हो सका, आइए इसे विभिन्न पहलुओं से समझते हैं और साथ में आपको ये भी बताए आदिवासी रिजर्व 28 सीटों का क्या रहा हाल?

आदिवासियों को नहीं रास आया घुसपैठ का मुद्दा!
भाजपा ने चुनाव प्रचार में घुसपैठ के मुद्दे को इस रूप में पेश किया था कि राज्य में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए आकर बस गए हैं, जो समाज के लिए खतरा हैं। यह मुद्दा आदिवासी समुदाय और स्थानीय लोगों के बीच असहमति पैदा कर सकता था क्योंकि इन समुदायों के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया था।
चुनावी आंकड़े बता रहे हैं कि आदिवासियों का भरोसा भाजपा पर नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा सम्भव है कि रघुवर दास का सीएनटी एक्ट में बदलाव की कोशिश आदिवासी समुदाय अभी तक नहीं भूल पाए हैं। भाजपा ने इस चुनाव में आदिवाासियों को साधने के लिए चम्पाई सोरेन को भी अपने साथ लिया था लेकिन वो भी उनके घाव को नहीं भर पाए हैं।
भाजपा के चुनाव प्रचार में आदिवासी चेहरों की भी कमी देखी गई थी। बाबूलाल मरांडी को छोड़कर, ऐसा कोई आदिवासी नेता नहीं था, जो पूरे प्रदेश में प्रचार किया हो। इसका वोटरों में गलत मैसेज गया था। वहीं भाजपा के नेताओं का झारखंड में आदिवासियों से जुड़ाव भी नहीं हो पाया है।
आदिवासियों महिला वोटरों को अपनी ओर खींचने के लिए भाजपा के पास कल्पना सोरेन का कोई काट नहीं था। कल्पना सोरेन ने जेएमएम के लिए जिस तरह से 100 से अधिक चुनावी रैलियां की, उसने आदिवासी महिला वोटरों को एकजुट करने का काम किया। इसके अलावा जेएमएम के लिए सबसे बड़ा फैक्टर मैया सम्मान योजना भी रहा, जिसमें महिलाओं के खाते में सीछे एक हजार रुपये अकाउंट में गए।
हेमंत सोरेन के जेल जाने से भी आदिवासी वोटरों में नाराजगी थी। कल्पना सोरेन ने भी अपनी हर रैली में अपने पति के जेल जाने के बारे में बोलकर ये याद दिलाया है कि केंद्रीय एजेंसी ने उन्हें झूठे केस में फंसाया है।
झारखंड चुनाव 2024: 28 आदिवासी रिजर्व सीटों पर कौन जीता कौन हारा?
- 1. बोरियो JMM
- 2. बरहेट JMM
- 3. लिट्टीपाड़ा JMM
- 4. महेशपुर JMM
- 5. शिकारीपाड़ा JMM
- 6. दुमका JMM
- 7. जामा JMM
- 8. घाटशिला JMM
- 9. पोटका JMM स
- 10. रायकेला भाजपा
- 11. चाईबासा JMM
- 12. मझगांव JMM
- 13. जगन्नाथपुर कांग्रेस
- 14. मनोहरपुर JMM
- 15. चक्रधरपुर JMM
- 16. खरसावां JMM
- 17. तमाड़ JMM
- 18. तोरपा JMM
- 19. खूंटी JMM
- 20. खिजरी कांग्रेस
- 21. मांडर कांग्रेस
- 22. सिसई JMM
- 23. गुमला JMM
- 24. बिशुनपुर JMM
- 25. सिमडेगा कांग्रेस
- 26. कोलेबिरा JMM
- 27. लोहरदगा कांग्रेस
- 28. मनिका कांग्रेस












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