Jharkhand Chunav: रुबिका पहाड़िया, मंडल मुर्मू, जामताड़ा, BJP के 'घुसपैठिया' कार्ड को चंपाई ने कैसे दी नई धार?
Jharkhand Chunav 2024: बीजेपी इस बार विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले से ही झारखंड के संथाल परगना इलाके में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक भी इस मसले को उठा चुके हैं। अब पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने इस मसले को इस तरह से उठाया है, जो जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन पर सीधा चोट कर सकता है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा से बीजेपी में आए चंपाई सोरेन अब एक एक्स पोस्ट के जरिए संथाल परगना में 'बांग्लादेशी घुसपैठियों' को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सीएम हेमंत सोरेन के जेएमएम पर सीधा निशाना साधा है। भाजपा को इस मुद्दे पर और ज्यादा आक्रामक होने का मौका मंडल मुर्मू के पार्टी में शामिल होने की वजह से मिला है, जो हेमंत सोरेन के प्रस्तावक तो रहे ही हैं, सिद्धो-कान्हू जैसे महान संथाल क्रांतिकारी के वंशज भी हैं। चंपाई ने मंडल मुर्मू के बीजेपी में शामिल होने की वजह बताते हुए ही झारखंड मुक्ति मोर्चा पर जोरदार अटैक किया है।

मंडल मुर्मू बीजेपी में क्यों शामिल हुए?
पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने अपने पोस्ट में लिखा है, 'संथाल हूल के अमर शहीद सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू भी आखिरकार BJP में शामिल हो गए। क्या आप जानना चाहते हैं कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले इस युवक ने ऐसा निर्णय क्यों लिया?'
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आदिवासियों के हालत को लेकर बहुत ही गंभीर आरोप
उन्होंने इसके लिए भोगनाडीह गांव के हालातों का जिक्र किया है, जिसपर वनइंडिया एक रिपोर्ट पहले ही दे चुका है। यह मंडल मुर्मू और उनके पूर्वज सिद्धो-कान्हू का पैतृक गांव है। लेकिन, चंपाई का आरोप है कि सत्ताधारी जेएमएम की वजह से बांग्लादेशी घुसपैठियों के हौसले इतने बढ़ चुके हैं कि वह आदिवासियों की जमीन तो लूट ही रहे हैं, उनकी बहू-बेटियों की इज्जत से भी खेल रहे हैं।
इलाके के कई गांवों में आदिवासियों के अब अल्पसंख्यक बन जाने और मुसलमानों के बहुसंख्यक होने से जुड़े तथ्य हमारी पिछली रिपोर्ट में शामिल हैं। अब चंपाई का दावा है कि मौजूदा सरकार आदिवासियों के हितैषी होने की बात करती है, लेकिन इसी ने हाई कोर्ट में गलत हलफनामा देकर सच को झुठलाने की कोशिश की।
जेएमएम की प्राथमिकता घुसपैठियों को बचाना- चंपाई सोरेन
यही नहीं, 'जब हाई कोर्ट से फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का आदेश जारी हुआ तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।' बीजेपी नेता ने आरोप लगाया है 'इसी से पता चलता है कि इनकी प्राथमिकता आदिवासियों को नहीं, बल्कि घुसपैठियों को बचाना है।'
संथाल परगना क्यों बन गया 'क्राइम कैपिटल'?
कोल्हान टाइगर के नाम से मशहूर चंपाई ने तो यहां तक दावा किया है कि घुसपैठियों की वजह आज संथाल परगना देश का 'क्राइम कैपिटल' बन गया है। उन्होंने जिक्र भी किया है और यह तथ्य भी है कि जामताड़ा साइबर क्राइम की वजह से आज देश ही नहीं दुनियाभर में कुख्यात हो चुका है।
विपक्षी नेता ने इलाके के हालात बयां करने के लिए आदिवासी युवती रुबिका पहाड़िया पहाड़िया की जघन्य हत्या का भी मु्ददा उठाया है और दिल-दहला देने वाले अंकिता हत्याकांड की भी याद दिलाई है। यही नहीं, उन्होंने जेएमएम नेतृत्व पर सिद्धो-कानहू के एक और वंशज रामेश्वर मुर्मू की हत्या के मामले में परिवार को न्याय नहीं दिला पाने का भी जेएमएम सरकार पर आरोप लगाया है।
मंडल मुर्मू को बीजेपी में आने पर कौन दे रहा है धमकी?
उनका दावा है कि 'भाजपा में शामिल होने के बाद मंडल मुर्मू को धमकियां दी जा रही हैं...इन सब के पीछे वही लोग हैं, जिन्हें लगता है कि वे आदिवासियों को हर मुद्दे पर बेवकूफ बना सकते हैं, डरा-धमका कर चुप करवा सकते हैं। उन लोगों का असली डर ये है कि कहीं हम लोग उनके चेहरे से आदिवासियत का नकाब ना उतार दें। कहीं दुनिया को उनकी सच्चाई ना पता चल जाए.....।'
उन्होंने कांग्रेस पर भी झारखंड आंदोलन को गोलियों से कुचलने का आरोप लगाया है और उसे हमेशा से ही आदिवासी और झारखंड विरोधी बताया है। चंपाई कोल्हान इलाके के नेता हैं। लेकिन, जिस तरह से उन्होंने संथाल परगना में आदिवासियों की आबादी घटने और वहां बढ़ते अपराध को मुद्दा बनाकर अपनी पुरानी पार्टी पर जोरदार हमला शुरू किया है, उससे सत्ताधारी गठबंधन की परेशानी बढ़ सकती है।
संथाल में विधानसभा की 18 सीटें हैं, जहां 2019 में बीजेपी सिर्फ 4 सीटें ही जीती थी। अबकी बार पार्टी जेएमएम के कोर वोट बैंक आदिवासियों को ही अपने पाले में करने की कोशिशों में जुटी हुई है।












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