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'बाहरियों ने झारखंड को बनाया चारागाह', धनबाद में कुछ यूं व‍िपक्षियों पर बरसे सीएम सोरेन

झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ने बोलते हुए कहा कि '20 साल बाद पहली बार आदिवासी-मूलवासी की सरकार बनी है।' सरकार बनते ही कोविड महामारी फैल गई, लेकिन हमने बेहतर प्रबंधन से झारखंड को इससे बाहर निकाला।

Jharkhand CM Hemant Soren

Jharkhand CM Hemant Soren: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के स्थापना दिवस पर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ा बजाते हुए जुलूस निकाला। इस दौरान धनबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, '20 साल बाद पहली बार आदिवासी-मूलवासी की सरकार बनी है।' सरकार बनते ही कोविड महामारी फैल गई, लेकिन हमने बेहतर प्रबंधन से झारखंड को इससे बाहर निकाला।

झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि संघर्ष और बलिदान झारखंडियों की किस्मत में ही लिखा हुआ है। सरकार बनते ही कोविड महामारी फैल गई, लेकिन हमने बेहतर प्रबंधन से झारखंड को इससे बाहर निकाला। मजदूरों को हवाई जहाज से मंगवाया। दो साल बाद जब जीवन पटरी पर लौटा तो हमने विकास को गति दी। इस गति को देखकर विपक्षियों को पेट दर्द हो रहा है। कहा कि जिस तरह गुरुजी को जीवन भर कोर्ट कचहरी का चक्कर कटवाया, जेल भि‍जवाया, आज फिर वही हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जैसे गुरुजी लड़े, हम भी लड़ रहे हैं। हमारी मांगों को बराबर असंवैधानिक बताया जा रहा है। सरना धर्म कोड, 1932 खतियान लाया तो यूपी, बिहार के लोगों को पेट दर्द हो रहा है। कोर्ट जाने वाले 20 में से एक भाजपा नेता और 19 यूपी, बिहार के लोग हैं। कर्नाटक में भाजपा सरकार ने स्थानीय लोगों को नौकरी में प्राथमिकता दी तो वह संवैधानिक हो गया। उन्होंने कहा कि कोल कंपनियों पर झारखंड के अरबों रुपये बकाया हैं।

सबसे अधिक झारखंडी बाहर मजदूरी कर रहे हैं और बाहर के लोगों ने झारखंड को चारागाह बनाया दिया है। कहा कि सरकारी कर्मियों का भी शोषण किया गया। सरकारी कर्मी धैर्य रखें, सरकार आपकी समस्या सुलझाएगी। पैरा शिक्षक, आंगनबाड़ी कर्मियों को सरकार ने हक दिया है। हमलोग कानून बनाते हैं तो लोग जश्न मनाते हैं। जाति के नाम पर सरकारी महकमे को परेशान कर रखा था। कोर्ट कचहरी सिर्फ सोरेन परिवार पर होता है। उन्‍हें मालूम है कि सोरेन परिवार के रहते इनकी दाल नहीं चलेगी। आदिवासी मूलवासी की सरकार बने यह इन्हें मंजूर नहीं है। जब इन्‍होंने अपने लोगों को पांच साल नहीं चलने दिया तो हमें पांच साल रहने देंगे।

झारखंडियों को बोका समझते हैं। हम व्यापारियों के प्रतिनिधि नहीं हैं। महंगाई पहले डायन लगती थी, अब भौजाई लगती है। 20 लाख गरीबों का हरा राशन कार्ड हमने बढ़ाया। सरकार हमें एफसीआई से राशन नहीं दे रही है। बाजार दर पर चावल खरीदकर गरीबों को दे रहे हैं।

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